
नई दिल्ली: कांग्रेस ने वायुसेना के लिए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की डील में गड़बड़ी को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधने के बाद कांग्रेस प्रवक्ताओं और राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने राफेल डील में प्रति विमान करीब एक हजार करोड़ अधिक कीमत चुकाने का आरोप लगाया। दावा किया गया है कि कि यूपीए सरकार 2012 में ही इस विमान के सौदे को अंतिम रूप दे चुकी थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे न सिर्फ बदल दिया बल्कि इस सौदे से एचएएल को बाहर कर एक निजी कम्पनी को लाभ पहुंचाया।
मोदी ने खुद बदली डील
राहुल गांधी ने कहा कि इसका क्या मतलब है कि राफेल डील दो सरकारों के बीच है और उसकी कीमत नहीं बताई जा सकती। गांधी ने कहा कि इसका एक ही मतलब है कि ये एक घोटाला है, मोदी पेरिस गए और उन्होंने डील को बदल दिया। इससे पहले रक्षा खरीद सम्बंधी तमाम नियम कायदों को ताक पर रखने के साथ ही कैबिनेट की सुरक्षा कमेटी से भी सौदे पर मुहर नहीं लगवाई गई।
घोटाला तो हुआ- राहुल गांधी
इतना ही नहीं राहुल गांधी ने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण पर भी निशाना साधा है। राहुल ने कहा कि रक्षामंत्री कहती हैं कि सौदे के बारे में भारत, शहीद और उनके परिवार को विमान पर हुए खर्च का ब्यौरा नहीं देंगी। इसका सीधा सा मतलब हुआ कि घोटाला तो हुआ है।
UPA ने डील की, मोदी ने बदली
मोदी सरकार पर देश के हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाब नबी आजाद ने कहा कि यूपीए विमान निर्माण तकनीक हस्तांतरण को सौदे में शामिल कर चुकी थी जिसे मोदी सरकार ने बदल दिया।
रक्षा मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों को बताया शर्मनाक, कहा- UPA सरकार ने लटकाया राफेल सौदा
तीन गुना कीमत तय, संख्या भी कम कर दी...
राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, राज्यसभा में राफेल की कीमत का सवाल पूछने वाले राजीव गौडा और प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि यूपीए सरकार 126 राफेल के सौदे को अंतिम रूप दे चुकी थी। एक राफेल 526 करोड़ में खरीदना था। लेकिन मोदी सरकार ने विमानों की संख्या 36 कर उन्हें तीन गुनी कीमत पर (1570 करोड़ में एक विमान) खरीदने का सौदा कर लिया।
Updated on:
07 Feb 2018 12:21 pm
Published on:
07 Feb 2018 10:20 am

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