विक्षुब्ध गुट की इस कार्रवाई के बाद रालोसपा में टूट अवश्यंभावी हो गया है। इससे पूर्व विक्षुब्ध नेताओं ने कुशवाहा को अवसरवादी बताया और कहा कि पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचने वाले कार्यकर्ताओं की उन्होंने कभी कद्र नहीं की। पार्टी में माफियाओं और दलालों को तरजीह दी जा रही थी, जिसके कारण पार्टी को बचाने के लिए यह महाधिवेशन बुलाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कुशवाहा को भी इस अधिवेशन में बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आये।