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रालोसपा में दो फाड़, कुशवाहा को हटा अरुण कुमार बने पार्टी अध्यक्ष

रालोसपा के विक्षुब्ध गुट ने उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर सासंद अरुण कुमार को रालोसपा का नया अध्यक्ष चुन लिया है। इस कार्रवाई के बाद पार्टी में विभाजन अब निश्चित दिख रहा है।

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shiv shankar

Aug 17, 2016

upendra kushwaha

upendra kushwaha

पटना। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के विक्षुब्ध गुट की बुधवार को हुई बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर उनके स्थान पर सांसद अरुण कुमार को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया।

रालोसपा के विक्षुब्ध गुट की ओर से यहां बुलाये गये पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के विशेष महाधिवेशन में उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव लाया गया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद सांसद अरुण कुमार को रालोसपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया।

कुशवाहा को बताया अवसरवादी
विक्षुब्ध गुट की इस कार्रवाई के बाद रालोसपा में टूट अवश्यंभावी हो गया है। इससे पूर्व विक्षुब्ध नेताओं ने कुशवाहा को अवसरवादी बताया और कहा कि पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचने वाले कार्यकर्ताओं की उन्होंने कभी कद्र नहीं की। पार्टी में माफियाओं और दलालों को तरजीह दी जा रही थी, जिसके कारण पार्टी को बचाने के लिए यह महाधिवेशन बुलाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कुशवाहा को भी इस अधिवेशन में बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आये।

मोदी सरकार को समर्थन जारी
सांसद अरुण कुमार ने कहा कि पार्टी के संस्थापकों ने उन्हें अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया है। यह बिलकुल संवैधानिक फैसला है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की भावना के अनुरूप संगठन को मजबूत बनायेंगे। पार्टी पूर्व की तरह ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में बनी रहेगी और नरेन्द्र मोदी सरकार को समर्थन जारी रखेगी।

रालोसपा ने सम्मेलन को बताया फ्लॉप
इस बीच रालोसपा ने पार्टी के कुछ निलंबित नेताओं की ओर से बुलाये गये सम्मेलन को फ्लॉप करार देते हुए कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इसे पूरी तरह नकार दिया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शम्भूनाथ सिन्हा ने कहा कि अरुण कुमार जिस समाज के प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं, उनकी संख्या भी सम्मेलन में बिल्कुल नगण्य रही।

सिन्हा ने कहा कि कुमार ने अपने बड़बोलेपन के कारण हमेशा अपने ही समाज को संकट में डाला है। जब कभी भी समाज संकट में आया है तो कुमार ने दिल्ली का रूख कर लिया। ऐसे में वह किस अधिकार के साथ समाज के समर्थन की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बताना चाहिए कि कुछ राजनीतिक ठेकेदारों द्वारा बुलाये गए भाड़े के लोगों के बल वह कौन-सा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की सोच रहे हैं।

खेमे में शामिल नेताओं के खिलाफ होगी कार्रवाई
रालोसपा प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि कुमार की फितरत रही है कि जिन्होंने भी उन्हें सहारा दिया, सम्भलते ही उन्होंने सहारा देने वाले को धक्का देने की कोशिश की है। इसलिए उनकी इस प्रवृति से वाकिफ लोग उनसे किनारा करने में ही अपनी भलाई समझते हैं।

गौरतलब है कि कुशवाहा ने कुछ दिन पहले ही अरुण कुमार की अध्यक्षता वाली रालोसपा की बिहार ईकाई को भंग कर दिया था। इसके बाद उनके कई समर्थकों को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप में कुशवाहा ने पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसपर नाराज कुमार ने कुशवाहा पर हवाला कारोबारियों से साठगांठ का भी आरोप लगाया था और इसको लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक को पत्र भी लिखा था।

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