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शरद पवार ने दिया महाराष्‍ट्र में सरकार गठन के मुद्दे को नया मोड़, कहा- पावरलेस होता है डिप्टी सीएम

पूर्ण मंत्रिमंडल गठन से पूर्व शरद पवार का बड़ा बयान कहा- गठबंधन सरकार से एनसीपी को क्‍या मिला एनसीपी के पास हैं कांग्रेस से 10 सीटें ज्‍यादा

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नई दिल्‍ली। महाराष्‍ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बने अभी 6 दिन ही बीते हैं कि असंतोष के स्‍वर उभरकर सामने आने लगे हैं। इस बार एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि मंत्रालय के बंटवार को लेकर उनकी पार्टी एनसीपी और शिवसेना के बीच कोई झगड़ा नहीं है। यह कांग्रेस और एनसीपी के बीच का मामला है।

मराठा क्षत्रप शरद पवार ने कहा कि एनसीपी के पास शिवसेना से दो सीटें कम हैं, जबकि कांग्रेस से 10 सीटें ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि शिवसेना के पास मुख्यमंत्री है जबकि कांग्रेस के पास स्पीकर है। लेकिन मेरी पार्टी को क्या मिला? डिप्टी सीएम के पास कोई अधिकार नहीं होता।

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रोटेशनल आधार पर हो सीएम

एनसीपी प्रमुख पवार का यह बयान देकर रोटेशनल आधार पर सीएम की चर्चाओं को जोर दे दिया है। तीनों दलों के बीच सहमति के बाद महा विकास अघाड़ी ( MVA ) की गठबंधन सरकार बनने के दौरान यह चर्चा भी थी कि एनसीपी ढाई-ढाई साल रोटेशनल सीएम चाहती है। खुद शरद पवार ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि शिवसेना और एनसीपी के बीच ढाई-ढाई साल सीएम को लेकर बात हुई थी।

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दिलचस्‍प सियासी टि्वस्‍ट
उन्‍होंने बताया कि जब सरकार गठन हो गया तो शिवसेना की तरफ से स्पष्ट तौर पर कहा गया कि शिवसेना का सीएम पूरे पांच साल रहेगा। अब जबकि उद्धव सरकार ने काम शुरू कर दिया है तो शरद पवार ने एनसीपी के खाते में आए डिप्टी सीएम के पद को कमजोर बताया है।

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि एनसीपी क्या अपना डिप्टी सीएम बनाती है या फिर महाराष्ट्र में कोई और टि्वस्‍ट सामने आता है।

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बयानबाजी का मतलब

बता दें कि महाराष्ट्र में लंबी जद्दोजहद और फुल सियासी ड्रामे के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार तो बनी है। लेकिन अब बंटवारे पर बयानबाजी भी शुरू हो गई है। तीनों दलों को साथ लाने में सबसे बड़े किंगमेकर की भूमिका में उभरे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने मंत्रालयों के बंटवारे पर बयान देकर मामले को ट्विस्ट दे दिया है।

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शरद पवार का यह बयान सियासी नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि महाराष्ट्र में बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस और एनसीपी ने शिवसेना को समर्थन दिया है। तीनों दलों के बीच सरकार चलाने के लिए एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाया गया है, लेकिन मंत्रालयों का बंटवारा अभी तक नहीं हो सका है।