सामना के संपादकीय में लिखा है कि "सिर्फ 6-7 आतंकियों ने हमारे खिलाफ युद्ध का ऐलान किया है। जिस बड़ी फौज का ढोल हम बजाते रहते हैं उस ढ़ोल को फोड़ने वाला ये मामला है। सीमा ही नहीं देश की आतंरिक सुरक्षा भी धाराशाई हो गई है। यह इस बात का सबूत है। विपत्ति के समय सरकार के विरोध में बोलना ठीक नहीं है। टीका-टिप्पणी नहीं करते हुए सरकारी कार्रवाई का समर्थन करो क्योंकि यह देश की सुरक्षा का मामला है। लेकिन सुरक्षा का मामला होने के बाद भी क्या सरकार गंभीर है? सिर्फ 6-7 आतंकियों ने फौज को चुनौती दी है। सात जवान शहीद हुए हैं, 50 घायल हैं।"