कानपुर। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बार फिर अपने बयान से विवाद पैदा कर दिया है। उन्होंने शनिवार को कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जवाहर लाल नेहरू उतने पढ़े लिखे नहीं थे, इसलिए उनके नाम पर किसी विश्वविद्यालय का नाम नहीं होना चाहिए। उन्होंने साथ ही जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) का नाम बदलकर सुभाष चन्द्र बोस यूनिवर्सिटी रखने की मांग कर डाली।
चार महीने के लिए बंद कर देना चाहिए JNU बीजेपी नेता स्वामी कानपुर के वीएसएसडी कालेज में वैश्विक आतंकवाद ( कश्मीर समस्या के संदर्भ में) विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करने आए थे। स्वामी ने आरोप लगाया कि जेएनयू ऐसे लोगों का अड्डा बनती जा रही है जो देश के खिलाफ साजिश में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जेएनयू को चार महीने के लिए बंद कर देना चाहिए और वहां तलाशी अभियान चलाना चाहिए।
नेहरु के कारण कश्मीर में लागू किया गया अनुच्छेद 370
इस दौरान उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और कहा कि राहुल का जेएनयू जाने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने कहा कि जेएनयू के पांच प्रतिशत छात्रों को छोड़कर बाकी सब पढऩा चाहते हैं, जबकि सिर्फ पांच फीसदी छात्र जो वामपंथी और कांग्रेस विचारधारा के है वही सब बवाल करते हैं। इसलिए इस यूनिवर्सिटी को चार महीने के लिए बंद कर देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 नेहरु के कारण ही लागू किया गया, जबकि डॉ बाबा साहेब अंबेडकर ने इसका विरोध किया था।
स्वामी के काफिले पर कांग्रेसियों ने फेंके अंडे, टमाटरउत्तर प्रदेश के शहर कानपुर में शनिवार को भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के काफिले पर कुछ कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कूड़ा, अंडे, टमाटर और कालिख फेंकी और उसे रोकने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस ने हल्का लाठी चार्ज कर सभी कार्यकर्ताओं को वहां से भगा दिया। पुलिस की कार्रवाई में कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को मामूली चोटें भी आई हैं।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से भगाने की कोशिश की, जिसकी वजह से थोड़ी झड़प भी हो गई। बाद में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गए।
पुलिस ने नहीं किए सुरक्षा के इंतजामभाजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 11 बजे स्वामी का काफिला नरवना चौक की ओर जा रहा था। वहां पहुंचते ही कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उनपर कूड़ा, अंडे, टमाटर और कालिख फेंकनी शुरू कर दी। मैथानी ने आरोप लगाया कि स्वामी के कार्यक्रम के बारे में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को पहले से सूचना दे दी गयी थी, इसके बावजूद पुलिस ने उनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया था।