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नई दिल्ली: लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर सख्ती दिखाते हुए सवाल किया कि इसकी नियुक्ति में इतनी देरी क्यों हुई है। शीर्ष कोर्ट ने केंद्र को 10 दिन के भीतर लोकपाल की नियुक्ति की समयसीमा तय कर सूचित करने को कहा है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर. भानुमति की पीठ ने केंद्र से इसमें देरी होने के लिए विस्तार से जानकारी मांगी है। पीठ ने कहा कि सक्षम अधिकारी को इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल करना होगा कि लोकपाल की नियुक्ति के लिए कौन-से कदम उठाए जा रहे हैं और उसके पूरा होने में कितना समय लगेगा।सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने लोकपाल की नियुक्ति के संबंध में लिखित दस्तावेज सौंपे। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को तय की गई है।
कानून लागू होने के बाद नहीं हुई नियुक्ति
एनजीओ कॉमन कॉज की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के अनुच्छेद तीन का हवाला देते हुए कहा कानून के लागू होने के साढ़े चार वर्ष बाद भी अभी तक कोई लोकपाल नहीं है। शांति भूषण ने अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने और लोकपाल नियुक्त करने का आग्रह किया।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी दे चुका है आदेश
पिछले साल लोकपाल की नियुक्ति नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने एक्ट में संशोधन के बिना ही लोकपाल की नियुक्ति करने का आदेश जारी किया था। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि केंद्र के पास लोकपाल नियुक्ति को लटकाए रखने का कोई तर्कसंगत कारण नहीं। वहीं केंद्र ने 15 मई को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि मुकुल रोहतगी को लोकपाल की नियुक्ति के लिए चयन समिति में विधिवेत्ता के रूप में नियुक्त किया गया है। इस चयन समिति में एक प्रमुख विधिवेत्ता के अलावा देश के प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, लोकसभा स्पीकर, लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता हैं।
Published on:
02 Jul 2018 06:05 pm
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