Naga Community Peace Dialogue: मुइवा की हठधर्मिता और सत्‍ता लालसा से पैदा गतिरोध

  • नगा समस्या के Peace negotiator RN Ravi और थुंगालेंग मुइवा के बीच उपजे अविश्वास के कारण फटाव
  • Nationalist Socialist Council of Nagaland (IM) खुद को नगा हितों का प्रहरी और पोषक बताता है

By: Mohit sharma

Updated: 05 Sep 2020, 09:35 PM IST

नई दिल्ली। नगा समस्या ( Naga problem ) के शांति-वार्ताकार आरएन रवि ( Peace negotiator RN Ravi ) और थुंगालेंग मुइवा ( Thungaleng Muivah ) के बीच उपजे अविश्वास के कारण फटवा बढ़ता जा रहा है। दोनों के बीच पनपते अविश्वास का जो कारण भी साफ है। Nationalist Socialist Council of Nagaland
(आइएम) खुद को नगा हितों का एकमात्र प्रहरी और पोषक संगठन बताता है। वहीं, शांति वार्ताकार आरएन रवि का अनुभव इससे काफी अलग है। आरएन रवि के मुताबिक इस संगठन विश्वसनीयता और स्वीकार्यता नगा समाज के बीच संदेहास्पद है।

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उनका कहना है कि अपनी नृशंसता के बावजूद नगा समुदाय में यह संगठन उनकी आकांक्षाओं की आवाजा के रूप में नहीं उभर पाया है। यही वजह है कि केवल उसके साथ शांति वार्ता के माध्यम से नगा समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सकता है। इसके साथ के उनकी ओर से नगाओं के दूसरे संगठनों और समूहों के साथ भी शांति वार्ता का आगाज करने से यह ग्रुप भड़क उठा है। नतीजतन उसने फिर से जंगलों में लौटकर सशस्त्र संघर्ष करने की धमकी देना आरंभ कर दया है।

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आपको बता दें कि साल 1975 के शिलांग समझौते की देन इस हिंसावादी संगठन की उत्तपत्ति में एसएस खापलांग, आइजैक चिशी स्वू और थुंगालेंग मुइबा जैसे चरमपंथियों की प्रमुख भूमिका था। जिन्होंने आगे चलकर साल 1980 में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (एनएससीएन) का निर्माण किया। इस संगठन ने शिलांग समझौते को नगा आंदोलन के साथ थोखा बताया। एनएससीएन ने नगा समुदाय से एकजुट होने का आहृवाण किया। यह संगठन ने माओ की कार्यशैली से प्रेरित था। यही वजह है कि ये हिंसा में यकीन करते हैं।

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