
नई दिल्ली। पुणे की मेयर और बाल गंगाधर तिलक के परपोते शैलेष की पत्नी मुक्ता तिलक ने राजस्थान की किताब में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को 'आतंक का जनक' बताने पर कहा कि यही दिन देखना बाकी रह गया था। उन्होंने कहा कि यह तिलक का अपमान नहीं, बल्कि पूरे देश और आजादी के रणबांकुरों का अपमान है। यह हमारे देश के लिए शर्मनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि बाल गंगाधर ने देश को अपने जीवन के पचास साल दिए। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाकर रख दी थी। इसके बाद भी उन्हें आतंक का जनक कहना महान भूल है। इस मामले की जांच होनी चाहिए। दोषियों को सजा दिलाने की जरूरत है।
किताब के प्रकाशक ने मानी गलती
राजस्थान में 8वीं कक्षा की किताब में स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को आतंकवाद का जनक बताया गया है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों में 8वीं कक्षा की एक संदर्भ पुस्तक में इस बात का उल्लेख है। यह मामला सामने आने के बाद प्रकाशक ने इसे अनुवाद की गलती बताते हुए सुधार की बात कही है। प्रकाशक ने सभी पुस्तकों को तत्काल प्रभाव से मार्केट से वापस लेने की भी बातें की है। कांग्रेस ने इस भूल की सख्त निंदा करते हुए पुस्तक को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग की है।
गणपति महोत्सव से घबरा गई थी अंग्रेजी हुकूमत
आपको बता दें कि राजस्थान राज्य पाठ्यक्रम बोर्ड किताबों को हिंदी में प्रकाशित करता है। इसलिए बोर्ड से मान्यता प्राप्त अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों के लिए मथुरा के एक प्रकाशक द्वारा प्रकाशित संदर्भ पुस्तक को इस्तेमाल में लाया जाता है। पुस्तक के पेज संख्या 267 पर 22वें अध्याय में तिलक के बारे में लिखा गया है कि उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन का रास्ता दिखाया था। इसलिए उन्हें आतंकवाद का जनक कहा जाता है। पुस्तक में तिलक के बारे में 18वीं और 19वीं शताब्दी के राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में लिखा गया है। पुस्तक में तिलक के हवाले से बताया गया है कि उनका मानना था कि ब्रिटिश अधिकारियों से प्रार्थना करने मात्र से कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता। शिवाजी और गणपति महोत्सवों के जरिए तिलक ने देश में अनूठे तरीके से जागरूकता फैलाने का कार्य किया। उनके इस पहल से अंग्रेजी हुकूमत घबराना गई थी।
Published on:
13 May 2018 12:39 pm
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