नायक अब खलनायक ! TIME ने लिखा- मोदी के कार्यकाल में हिंदू-मुस्लिम के बीच सौहार्द्र तेजी से कम हुआ

  • अमरिकी मैग्जीन 'Time' ने पीएम नरेंद्र मोदी को 'India's Divider in Chief' बताया
  • मैग्जीन के मई संस्करण में की गई है भारत के लोकसभा चुनाव और मोदी के पांच साल के कार्यकाल पर कवर स्टोरी
  • रिपोर्ट में अपने टाइटल को जस्टिफाई करने के लिए मैग्जीन ने किया है कई तथ्यों का विश्लेषण
  • ये वही मैग्जीन है जो मोदी को कई बार 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में और दो बार अपने कवर पेज पर नायक की तरह प्रस्तुत कर चुकी है।

Shweta Singh

May, 1111:18 AM

नई दिल्ली। अमरीकी मैग्जीन Time ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कवर स्टोरी प्रकाशित की है। मैग्जीन ने कवर स्टोरी का शीर्षक -India's Divider in Chief ( 'भारत का डिवाइडर-इन-चीफ') लिखा है। मैग्जीन ने केंद्र सरकार के पांच साल के कार्यकाल का विश्लेषण करते हुए मोदी को समाज और देश को बांटने वाला नेता बताया है। आतिश तासीर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि मोदी 2014 में ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देकर सत्‍ता में आए, लेकिन पांच साल में विकास दिखा नहीं , लोगों को हिंदू-मुस्लिम के नाम पर बांट दिया गया। तासीर ने गुजरात दंगों में मोदी के कथित चुप्पी पर सवाल उठाते हुए लिखा कि वो तो दंगाई भीड़ का हिस्सा बन गए। उन्‍होंने लिखा है कि मोदी ने नेहरू और उस दौर के धर्मनिरपेक्षवाद और समाजवाद के सिद्धांतों पर प्रहार किया और कांग्रेस मुक्‍त भारत की बात की।

मोदी सरकार के कार्यकाल पर विस्तृत रिपोर्ट

मैग्जीन ने एशिया एडिशन के मई संस्करण के लिए पीएम मोदी पर यह कवर स्टोरी की है। इसमें लोकसभा चुनाव 2019 और मोदी सरकार के पिछले पांच सालों के कार्यकाल पर विस्तृत रिपोर्ट छापी गई है। इस रिपोर्ट में साल 1947 से मोदी के कार्यकाल तक का विश्लेषण हैं। रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदु हैं, जिनके आधार पर इसे लिखने वाले पत्रकार आतिश तासीर ने पीएम मोदी को 'इंडिया का डिवाइडर-इन-चीफ' बताया है।

मैग्जीन ने मोदी को पहले भी दी है कवर पेज पर जगह

गौरतलब है कि अमरीकी मैग्जीन टाइम ने ही 2014, 2015 और 2017 में प्रधानमंत्री मोदी को विश्व के 100 सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था। इतना ही नहीं मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस समय वर्ष 2012 में और 2014 में जब वे प्रधानमंत्री बने तब 2015 में मैग्जीन ने अपने कवर पेज पर जगह दी थी।

  • 'क्या विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार के एक अन्य पांच साल भुगतेगा?' के हेडर वाले इस लेख में पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल और कामकाज की तुलना नेहरू के समाजवाद और भारत की मौजूदा सामाजिक स्थिति से की है। स्टोरी की शुरुआत 1947 से की गई है। बताया गया है कि ब्रिटिशराज से आजाद होकर जब देश का विभाजन हुआ तो तीन करोड़ से ज्यादा मुस्लिम भारत में रह गए थे। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सेकुलरिज्म का रास्ता अपनाया। उन्होंने हिंदुओं के लिए कानून को मानना अनिवार्य किया और मुस्लिमों के मामले में शरियत को सर्वोपरि दर्जा दिया गया। पत्रकार ने ट्रिपल तलाक मामले का जिक्र करते हुए लिखा है कि मोदी के कार्यकाल से पहले तक तो देश में यही व्यवस्था कायम रही, लेकिन मोदी राज में चीजें बदल गईं।

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  • पत्रकार आतिश ने इस लेख में लिखा है कि 2014 में गुजरात जैसे सूबे के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों के गुस्से को पहचाना और 282 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। देश पर लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस केवल 44 सीटों तक सिमट गईं। यहां तक कि उसे विपक्ष का नेता बनने लायक सीटें भी नहीं मिल सकीं। चुनाव से पहले मोदी ने लोगों के गुस्से को वोट में बदलने के लिए नारा दिया था, 'सबका साथ-सबका विकास'। लेकिन उनके शासनकाल के दौरान अविश्वास का दौर चल पड़ा। आर्टिकल के शुरुआत में यह भी लिखा गया है कि महान लोकतंत्रों का पापुलिज्म (लोकलुभावनवाद) की तरफ झुकाव की दिशा में भारत पहला लोकतंत्र होगा। इस लेख में तुर्की, ब्राजील, ब्रिटेन और अमरीका का जिक्र किया गया है।
  • रिपोर्ट में लिखा गया है कि मोदी के कार्यकाल में हिंदू-मुस्लिम के बीच सौहार्द्र तेजी से कम हुआ। आर्टिकल में भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि इस मुद्दे पर भाजपा वोटरों के ध्रुवीकरण की कोशिश में जुटी रही। रिपोर्ट में गोरक्षा के बारे में लिखते हुए पत्रकार ने लिखा है कि 'गाय के नाम पर एक खास वर्ग को लगातार निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, सरकार ने इस पर चुप्पी साधते हुए कोई ठोस कदम न उठाना ही बेहतर समझा।' रिपोर्ट में मोहम्मद नईम और गुजरात में गोरक्षा के नाम पर हुए एक हत्या का जिक्र किया गया है।
  • विपक्षियों पर हमलावर रहने वाले मोदी पर मैगजीन ने आगे लिखा कि अक्सर अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए वह कांग्रेस के दिग्गजों को निशाना बनाते नजर आते हैं। और क्योंकि मोदी जनता की नब्ज को अच्छी तरह जान चुके हैं। इसलिए जब-जब वह फंसा महसूस करते हैं, तो खुद को पिछड़ी जाति या गरीब का बेटा बताने से नहीं चूकते।'

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  • मैग्जीन का मानना है कि 2014 में लोगों को आर्थिक सुधार के बड़े-बड़े सपने दिखाकर सत्ता पर काबिज होने वाले मोदी अब इस बारे में बात तक नहीं करना चाहते। साथ ही अपनी इस नाकामी के लिए भी कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराकर, लोगों के बीच राष्ट्रवाद की भावना का फैलाने की कोशिश में रहते हैं। यही वजह है कि भारत-पाक के बीच जारी तनाव का फायदा भी मोदी बखूबी उठाते नजर आते हैं।
  • मैग्जीन में आगे यह भी दावा किया गया कि 'पीएम मोदी राजनीति को अपने इर्द-गिर्द घुमाने की कोशिश करते नजर आते हैं। इसी का असर है कि मोदी के एक युवा नेता तेजस्वी सूर्या कहते हैं कि अगर आप मोदी के साथ नहीं हैं, तो आप देश के साथ भी नहीं हैं।'
  • रिपोर्ट में महिलाओं के प्रति मोदी का दो तरह की राय पर भी बात की गई है। कहा गया एक तरफ तीन तलाक को खत्म करके मुस्लिम महिलाओं का मसीहा बनने की कोशिश में जुटे मोदी के ही कार्यकाल में महिलाओं की सुरक्षा के मामले में भारत का स्तर विश्व के अन्य देशों के मुकाबले लगातार गिरता जा रहा है। इस वक्त भारत सबसे निचले पायदानों में से एक पर पहुंचनेवाला है। वहीं, बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना पर किए मोदी की टिप्पणी भी उनकी महिलाओं को लेकर दोहरी नीति का उदाहरण है।

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  • रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि देश के धरोहर के सेक्युलरिज्म, लिबरलिज्म और प्रेस की आजादी मोदी कार्यकाल में धुंधले पड़ते नजर आए। इसके मुख्य कारणों में से एक रहा हिंदुत्व का उदय। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि सांप्रदायिक खाई के साथ-साथ जातिवाद की खाई भी लगातार बढ़ती जा रही है।
  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि 'देश के सबसे घनी आबादी वाले राज्य के चुनाव में भाजपा की जीत हुई। इस राज्य में सबसे अधिक मुस्लिमों की जनसंख्या भी है, लेकिन इसका ध्यान न देते हुए, भगवाधारी योगी को राज्य का मुख्यमंत्री चुना गया।' लिखा यह भी गया कि कैंपेन में योगी चेहरा नहीं थे, अगर ऐसा होता तो शायद नतीजें कुछ अलग होते।

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