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तीन तलाक बिल पर एनडीए घटक दलों में ही मतभेद, जेडीयू अलग

Triple Talaq Bill: लोकसभा में बिल का समर्थन नहीं करेगी JDU JDU ने कहा- हर पार्टी की अपनी नीति और एजेंडा बिल को लेकर सरकार को सभी पार्टियों से बात करनी चाहिए- JDU

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Kaushlendra Pathak

Jul 25, 2019

file photo

नई दिल्ली।मोदी सरकार 2.0 आज लोकसभा में तीन तलाक बिल ( triple talaq Bill ) लाने जा रही है। लेकिन इस बिल को लेकर सियासत गर्म है। कांग्रेस पार्टी तो शुरू से इस बिल का विरोध कर रही है। वहीं, अब BJP के सहयोगी दल JDU ने भी इसका विरोध किया है। JDU ने साफ कहा है कि सदन के अंदर वह इस बिल का विरोध करेगी। जेडीयू के इस विरोध से बीजेपी की चिंता बढ़ गई है।

पढ़ें- लोकसभा में आज पेश होगा तीन तलाक बिल, भाजपा-कांग्रेस ने जारी किया व्हिप

तीन तलाक बिल पर JDU-BJP के रास्ते जुदा

जेडीयू का कहना है कि मोदी सरकार ने इस बिल को लेकर किसी से बात नहीं की है। पार्टी प्रवक्ता संजय सिंह ने एक मीडिया हाउस से बात करते हुए कहा कि इस बिल को लाने से पहले मोदी सरकार को सभी से बात करनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि इस बिल को लेकर NDA के सहयोगी दलों से भी बात नहीं की गई। हालांकि, जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि हर पार्टी की अपनी नीति और अपना एजेंडा होता है।

जेडीयू का भी अपना एजेंडा है और पार्टी इस बिल का विरोध ( JDU won't support Triple Talaq Bill ) करेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सदन में जेडीयू बिल को स्टैंडिंग कमेटी में भेजने की मांग कर सकती है। विपक्षी दल पहले ही तीन तलाक बिल के खिलाफ एकजुट हैं और सरकार को इस बिल पर विचार करने को कह रहे हैं, ऐसे में अगर अपने ही गठबंधन से इसके खिलाफ आवाज उठती है तो सरकार के लिए मुश्किल हो सकती है।

पढ़ें- कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला- ट्रंप मामले से ध्यान भटकाने को लाया गया तीन तलाक बिल

पिछले कार्यकाल में लोकसभा से पास हो गया था बिल

गौरतलब है कि विगत जून महीने में ही बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा था कि हम इस बिल के समर्थन में नहीं हैं।

उन्होंने लॉ कमीशन को इस बारे में बताया था कि यह नाजुक मसला है लिहाजा इसमें सभी पक्षों से बात कर आम सहमति बनाने की करने कोशिश करनी चाहिए।

आपको बता दें कि मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही तीन तलाक बिल को लोकसभा से पास कराया था। लेकिन, यह बिल राज्यसभा से पास नहीं हो सका।

नई लोकसभा का गठन होने के कारण एक बार फिर बिल को सदन में पास कराने के लिए पेश करना पड़ रहा है।