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यूनेस्को ने माना दुनिया की अनोखी धरोहर कुंडी भंडारा, फिर भी आगे नहीं बढ़ रही कार्यवाही

- 2017 में यूनेस्कों ने किया था चयन- अब तक कुंडी भंडारे पर नहीं किया काम

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यूनेस्को ने माना दुनिया की अनोखी धरोहर कुंडी भंडारा, फिर भी आगे नहीं बढ़ रही कार्यवाही

यूनेस्को ने माना दुनिया की अनोखी धरोहर कुंडी भंडारा, फिर भी आगे नहीं बढ़ रही कार्यवाही

बुरहानपुर. दुनिया की एक मात्र जीवित भूमिगत जल स्त्रोत कुंडी भंडारे को यूनेस्को ने भी माना की यह अनोखी धरोहर है। विश्व धरोहर में इसे शामिल करने के लिए चिन्हित भी किया, लेकिन स्थानी शासन प्रशासन की ही उदासीनता के चलते इसकी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। यहां की रंगत भी फिकी पड़ रही है। कुंडी भंडारे के संरक्षण पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दरअसल 2017 में कर्नाटक के बिदर शहर में यूनेस्को की ओर से कार्यशाला आयोजित की गई थी। जहां 12 देश और भारत के 8 शहरों के प्रतिनिधि अपनी धरोहरों का महत्वता बताने पहुंचे थे। जिसमें मप्र से अकेले बुरहानपुर से कुंडी भंडारे को यहां प्रस्तुति देने के लिए चयन किया था। जिसका प्रस्तुतिकरण इंटेक प्रमुख व पुरातत्वविद् होशंग हवलदार ने बखूबी रखा भी। जिसका परिणाम यह हुआ कि यूनेस्को ने कुंडी भंडारे का चयन विश्व धरोहर में शामिल करने के लिए चयन किया। जिसकी खुशियां भी बुरहानपुर में बनाई गई।
आगे यह होना था
कुंडी भंडारे को विश्व धरोहर में शामिल करने के लिए आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी। यूनेस्को दल को बुरहानपुर में आमंत्रित किया जाना था। ताकि यहां के धरोहर को वह देख सके और इसके लिए कार्यवाही कर सके। लेकिन शासन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
ऐसा है कुंडी भंडारे का इतिहास
नगरवासियों को शुद्ध जल की आपूर्ति करने के उद्देश्य से खानखाना के शासन काल में 16 15 ई में अब्दुल रहीम खानखाना ने जल संग्रह.वितरण प्रणाली का निर्माण आरंभ किया था। उस दौरान 8 जल संग्रहण.वितरण प्रणालियों को निर्मित किया गया। इस प्रणाली के अंतर्गत तात्कालीन भू.गर्भ विधा विशेषज्ञों ने सतपुड़ा पर्वतमालाओं से ताप्ती नदी की ओर प्रवाहमान भूमिगत जल स्त्रोतों को खोजकर जलाशय बनाया था। इनकी नहरें 80 से 100 फीट तक गहरी हैं। इनकी सफाई, हवा, प्रकाश व्यवस्था को ध्यान में रखकर जगह.जगह कुंडियों का निर्माण किया गया। प्रणाली की विशेषता यह थी कि पानी स्वयं बहकर बिना किसी यांत्रिकीय सहयोग के पानी बहता है।
यूनेस्को ने इसलिए चयन किया था
पुरातत्वविद् होशंग हवलदार और सुधीर पारीख ने यहां प्रस्तुति दी। यूनेस्को के नियम के हिसाब से हेरिटेज में शामिल होने के लिए 600 साल पुराना शहर होना जरूरी है। इस पर हवलदार ने बताया कि बुरहानपुर शहर 3 हजार साल पुराना शहर है। 800 साल पुरानी महलगुलआरा की जल संरचना है और 400 साल पुरानी कुंडी भंडारे की भूमिगत जल संरचना है, जो पूरी दुनियार में एक मात्र जीवित धरोहर है। आज भी ढाई लाख लीटर पानी लोग इसका पीते हैं। इस बात पर यूनेस्को टीम ने बुरहानपुर को वल्र्ड हेरिटेज विश्व विरासत में चयन करने के लिए शामिल किया।