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TDP-YSR का अविश्‍वास प्रस्ताव आज भी मंजूर नहीं, जानिए सदन की कार्यवाही की 10 बातें

सोमवार को लोकसभा और राज्‍यसभा में विपक्षी दलों के जोरदार हंगामे से अविश्‍वास प्रस्‍ताव पर एक बार फिर बहस शुरू नहीं हो पाई।

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नई दिल्‍ली. सोमवार को लोकसभा में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस ने पीएम मोदी सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव का नोटिस दिया लेकिन सदन की कार्यवाही व्‍यवस्थित न होने से आज भी लोकसभा अध्‍यक्ष ने प्रस्‍ताव को अपनी मंजूरी नहीं दी। संसद में हंगामे के चलते सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्ताव आज नहीं उठाया नहीं जा सका क्योंकि लोकसभा अध्‍यक्ष को दोपहर तक के लोकसभा को स्थगित कर दिया गया था। दूसरी तरफ राज्‍यसभा को भारी हंगामे की वजह से कल तक के लिए स्‍थगित कर दिया गया है। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते टीडीपी ने खुद को एनडीए बाहर करने की घोषणा की थी। अब टीडीपी ने वाईएसआर कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार से सदन में विश्‍वास मत हासिल करने की मांग की है। अविश्‍वास प्रस्‍ताव को कांग्रेस सहित आधे दर्जन से अधिक विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है। हालांकि सरकार को इससे कोई खतरा नहीं है।

सदन की कार्यवाही की 10 प्रमुख बातें :
1. कांग्रेस, वाम मोर्चा, सपा, टीएमसी, एआईएमआईएम ने कहा कि वे टीडीपी प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। इसके बावजूद सरकार को कोई खतरा नहीं है। क्योंकि एनडीए की ताकत 543 सदस्यीय घर में अभी भी 315 है। बीजेपी के सहयोगी शिवसेना ने कहा है कि अगर प्रस्ताव मतदान में आता है तो इससे दूर रह जाएगा। पार्टी के अरविंद सावंत ने कहा कि हम न तो सरकार न ही विपक्ष का समर्थन करेंगे। एआईएडीएमके, टीआरएस और बीजू जनता दल ने तटस्थ रहने के संकेत दिए हैं।

2. विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है, लेकिन उसके पास उम्मीदें हैं कि अविश्‍वास प्रस्‍ताव से सरकार पर हमला करने का मौका मिलेगा। आज संसद परिसर में स्थित गांधी प्रतिमा के सामने टीडीपी और कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस के रेणुका चौधरी ने कहा कि बात संख्‍या बल की नहीं बल्कि सरकार को जनहित के मुद्दों पर घेरने की है।


3. एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सरकार को यह संदेश देना है कि हम उनकी नीतियों का समर्थन नहीं करते हैं। शुक्रवार को सीपीएम के समर्थन की घोषणा करते हुए सीताराम येचुरी ने ट्वीट कर कहा था कि हमारा मकसद सरकार की असफलता और संसदीय जवाबदेही को सदन और जनता के समक्ष उजागर करना है।


4. आपको बता दें कि अविश्‍वास प्रस्‍ताव के लिए कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के पास जरूरी संख्‍या नहीं है। टीडीपी के 16 और वाईएसआर कांग्रेस नौ सदस्‍य हैं। इसके लिए अन्य पार्टियों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

5. आंध्र को विशेष राज्‍य के मुद्दे पर पीएम मोदी सरकार से टीडीपी पिछले एक माह से नाराज है। यूपीए सरकार ने भी वादा किया था जो उसने पूरा नहीं किया था। 2014 के समझौते के मुताबिक टीडीपी को मोदी सरकार से विशेष दर्जा मिलने की उम्‍मीद थी। ऐसा न होने पर पहले एनडीए से अपना नाता तोड़ा और अब वाईएसआर से हाथ मिलकार अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने के मुद्दे पर अड़ी है। इसी बात को लेकर सदन में दोनों दलों का हंगामा जारी है।


6. राज्‍यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने हंगामे के बीच सांसदों से कहा कि देश हंस रहा है, सदन को चलने दीजिए, संसद को मजाक का विषय मत बनाईए। वेंकैया नायडू ने कहा कि विपक्ष और सरकार दोनों सदन को चलाना चाहते हैं फिर क्या दिक्कत है। उन्होंने कहा कि यह देशहित में नहीं है और आसन सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।


7. संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार सदन में अविश्‍वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार है।


8. भाजपा का कहना है कि आंध्र को विशेष राज्‍य का दर्जा देने के खिलाफ पार्टी नहीं है। पार्टी का मानना है कि इस मामले में कई पहलुओं पर घोषणा से पहले विचार करने की जरूरत है।


9. कांग्रेस व अन्‍य विपक्षी पार्टियों का मकसद इस मामले में टीडीपी के अविश्‍वास प्रस्‍ताव का समर्थन कर सदन में सरकार पर दबाब बनाना है।


10. आंध्र प्रदेश में टीडीपी पर जगन मोहन रेड्डी के वाईएसआर का दबाव बहुत ज्‍यादा है। वहां पर अगले साल लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी है। ऐसे में नायडू अपने ही प्रदेश में कमजोर नहीं दिखना चाहते है।