
बालश्रम पर एक्शन फोटो। एआइ
प्रतापगढ़। जिले में बालश्रम उन्मूलन अभियान के तहत लगातार कार्रवाई जारी है। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, गायत्री सेवा संस्थान एवं चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम की ओर से चलाए जा रहे बालश्रम मुक्त प्रतापगढ़ एवं उमंग-07 अभियान के तहत पिछले पांच दिनों में 10 से अधिक बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जा चुका है। साथ ही बालश्रम करवाने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ पांच प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं। राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य एवं अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेंद्र पण्ड्या ने कहा कि बालश्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक रामचन्द्र मेघवाल ने बताया कि बुधवार को पीपलखूंट थाना पुलिस ने बालश्रम के खिलाफ विशेष कार्रवाई करते हुए 7 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। कार्रवाई में उप निरीक्षक गौतमलाल मीणा, पुलिस जाप्ता, पूजा राजपूत, अंबालाल निनामा, गायत्री सेवा संस्थान एवं चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम शामिल रही। रेस्क्यू किए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें शेल्टर होम में प्रवेश दिलाया गया।
नियोक्ताओं के खिलाफ बालश्रम निषेध कानून के तहत पीपलखूंट थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है। रामचन्द्र मेघवाल ने बताया कि 1 जून से 30 जून तक जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के निर्देशन में एक्शन मंथ और उमंग-07 अभियान संचालित किया जा रहा है। अब तक कुल 10 से अधिक बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया जा चुका है तथा पांच एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। जोडने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
भारत में बालश्रम या बाल मजदूरी को रोकने के लिए सख्त कानून है। 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी दुकान, होटल, फैक्ट्री, ढाबे, घर या किसी भी काम की जगह पर काम करवाना गैरकानूनी माना जाता है। हालांकि, बच्चा स्कूल के बाद या छुट्टियों में परिवार के काम में मदद कर सकता है। बशर्ते काम खतरे वाला न हो और काम से पढ़ाई प्रभावित न हो।
वहीं 14 से 18 साल तक के बच्चों को ऐसे कामों में नहीं लगाया जा सकता जो उनकी जान या सेहत के लिए खतरनाक हों। अगर कोई व्यक्ति या मालिक बच्चों से कानून के खिलाफ काम करवाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे 6 महीने से 2 साल तक की जेल हो सकती है और 20 हजार से 50 हजार रुपए तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
Updated on:
11 Jun 2026 11:02 am
Published on:
11 Jun 2026 11:02 am
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