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राजस्थान: जंगल नहीं, अब खेतों में होगी बांस की खेती; 12 जिलों में संचालित होगी योजना

National Bamboo Mission: राष्ट्रीय बेंबू मिशन को फिर से शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य में बांस की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि करना और कृषि वानिकी को मजबूत करना है।

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bas ki kheti

Photo- AI

National Bamboo Mission: प्रतापगढ़। राजस्थान में उद्यान विभाग की ओर से राष्ट्रीय बांस मिशन को पुन: सक्रिय और प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य राज्य में बांस की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि करना और कृषि वानिकी को मजबूत करना है। इसके तहत किसानों को भ्रमण कराया गया।

गौरतलब है कि प्रदेश में यह योजना वर्ष 2007-08 से वर्ष 2016-17 के दौरान संचालित की गई थी, जो बाद में बंद हो गई थी। अब इसे फिर से शुरू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत उद्यान विभाग की ओर से प्रथम चरण में किसानों का चयन किया गया। इन पचास किसानों को विभिन्न जिलों में भ्रमण कराया गया।

प्रतापगढ़ जिले के पचास किसानों का किया चयन

बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना में उद्यान विभाग की ओर से पचास किसानों का चयन किया गया है। इन किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए विभिन्न स्थानों का भ्रमण कराया गया। इसमें खेती के लिए तकनीकी ज्ञान, फसल प्रबंधन एवं अन्य जानकारी दी गई।

इसके तहत किसानों को चित्तौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, सिरोही आदि क्षेत्रों के बांस प्लांटेशन, वन विकास समितियां, वन नर्सरी और बांस विक्रय केंद्र स्वरूपगंज सिरोही का भ्रमण कराया गया।

इस दौरान बांस की खेती, तकनीकी जानकारी और अगरबत्ती समेत विभिन्न उत्पाद बनाने की जानकारी दी गई। पश्चिमी राजस्थान की शुष्क जलवायु के लिए उपयुक्त बांस की तीन नई किस्मों पर भी काम किया जा रहा है।

बिना देखभाल के मिलती है आय

बांस की खेती कम देखभाल में भी संभव है। कम लागत और ज्यादा मुनाफे वाली इस खेती में एक बार रोपण के बाद चार से पांच साल में फसल तैयार हो जाती है। जो लंबे समय तक आय देती है।

कृषि वानिकी के तहत किसान मुख्य फसल के साथ मेड़ों पर भी बांस लगा सकते हैं। बांस से फर्नीचर, कागज, हैंडीक्राफ्ट और अगरबत्ती उद्योग में भारी मांग रहती है, जिससे किसानों को बाजार मिलने में आसानी होती है।

राष्ट्रीय बेंबू मिशन दस वर्ष पहले हुआ था बंद

गौरतलब है कि राष्ट्रीय बेंबू मिशन राजस्थान में वर्ष 2007-08 से वर्ष 2016-17 के दौरान संचालित थाए जिसे विभिन्न कारणों से वर्ष 2016-17 में बंद कर दिया गया था।

यह योजना राज्य के बारह जिलों में संचालित की जाएगी। इनमें बांसवाड़ा, बाड़मेर, भीलवाड़ा, चित्तौडग़ढ़, झालावाड़, करौली, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, उदयपुर, डूंगरपुर, राजसमंद और सिरोही शामिल हैं।

बांस की खेती और उत्पाद से मिलेगी आय

राष्ट्रीय बेंबू मिशन को फिर से शुरू किया गया है। प्रथम चरण में जिले के पचास किसानों का चयन कर उन्हें विभिन्न जिलों में बांस आधारित खेती और उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण देने के लिए भ्रमण कराया गया है।

  • रामकिशन वर्मा, उप निदेशक, उद्यान विभाग, प्रतापगढ़