
प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ
Rajasthan Cooperative Strike: प्रतापगढ़ जिले में सहकारी समितियों के कर्मचारियों की बीते 27 फरवरी से जारी हड़ताल से किसानों के आवश्यक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने कर्मचारियों के बेहतर प्रबंधन के लिए स्वतंत्र कैडर अथॉरिटी के गठन की मांग की है।
एक अप्रेल से कर्मचारियों ने रिकवरी सहित अन्य कार्यों का भी बहिष्कार कर दिया है। प्रदेशभर में ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारी और व्यवस्थापक हड़ताल पर होने से खाद-बीज वितरण, ऋण वसूली और पैक्स कम्प्यूटरीकरण जैसे कार्य ठप हो गए हैं। इसके चलते किसान समय पर ऋण जमा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं फसल ऋण जमा नहीं होने से ब्याज सब्सिडी में छूट मिलने का संकट भी किसानों को सता रहा है।
हड़ताल के कारण किसानों को खाद-बीज की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं फसल ऋण जमा नहीं होने से ब्याज सब्सिडी में छूट का जोखिम भी बढ़ गया है। इसके अलावा कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हो रहा है।
जिले में विभिन्न तहसीलों में सहकारी समितियों की संख्या 165 है। जिसमें दलोट में 18, अरनोद में 15, प्रतापगढ़ में 59, छोटी सादड़ी में 32, धरियावद में 29 और पीपलखूंट में 12 समितियां संचालित हैं।
संघर्ष समिति ने कर्मचारियों के बेहतर प्रबंधन के लिए स्वतंत्र कैडर अथॉरिटी के गठन की मांग की है। इसके साथ ही लंबे समय से कार्यरत व्यवस्थापक, सहायक व्यवस्थापक, सेल्समैन, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं सहायकों के नियमितिकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। इसके अलावा व्यवस्थापक से बैंकिंग सहायक पदों पर भर्ती में 20 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा केन्द्रीय सहकारी बैंक में व्यवस्थापकों को ऋण पर्यवेक्षक पद पर शत-प्रतिशत पदोन्नति देने की मांग भी उठाई गई है।
सहकारी समितियों के कर्मचारियों की मांगों को लेकर हड़ताल जारी है। ऐसे में हमारी वाजिब मांगों को लेकर सरकार ध्यान दें। जिससेे कर्मचरियों को राहत मिले।
नंदलाल रैदास, जिला अध्यक्ष, राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
Updated on:
07 Apr 2026 12:55 pm
Published on:
07 Apr 2026 12:55 pm
