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Monsoon Alert: खिलेंगे मायूस किसानों से चेहरे, इस दिन शुरु होगा झमाझम बारिश का दौर, बड़ा अपडेट जारी

मौसम विभाग का कहना है कि 5 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, 6 सितंबर को भरतपुर, कोटा, उदयपुर, 7 सितंबर को अजमेर, कोटा, उदयपुर, 8 सितंबर को भरतपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में बारिश हो सकती है।

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छोटीसादड़ी। क्षेत्र में लंबे समय से सूखा पड़ा रहने से खेतों में खड़ी फसलें बारिश की कमी से सूखने लगी है। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष आधी बारिश भी नहीं हुई है, जिसके कारण किसानों की सारी उम्मीदें अब फसले सूखने के साथ ही खत्म होती जा रही है। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही है। पूरा सावन माह सुखा रहने के कारण किसानों को भारी क्षति हुई है। लगभग 70 से 90 प्रतिशत फसल खराब हुआ है। वहीं मौसम विभाग का कहना है कि 5 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, 6 सितंबर को भरतपुर, कोटा, उदयपुर, 7 सितंबर को अजमेर, कोटा, उदयपुर, 8 सितंबर को भरतपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में बारिश हो सकती है।

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किसान चाह कर भी फसलों को सिंचाई नहीं पा रहा है। जलाशय तालाब, बांध सभी खाली पड़े हुए हैं। जहां थोड़ा बहुत पानी है, तो बिजली नहीं है। किसानों को मुश्किल घड़ी में मात्र दो से तीन घंटे बिजली भी बार-बार ट्रिपिंग के साथ मिल रही है। बिजली की कमी के कारण सिंचाई करना भी मुश्किल हो रहा है। गांव के किसान किशन जणवा ने बताया कि किसानों को अब उम्मीद है की नेताजी अपना वादा चुनावी वर्ष में निभाकर किसानों को कर्ज के बोझ तले से बाहर निकलेंगे। कर्ज का भार इतना बढ़ गया कि उनकी जमीन बिक गई, लेकिन कर्ज नहीं उतरा। ऐसे में किसानों की संपूर्ण केसीसी कर्ज माफी की जाए। रामनारायण जाट का कहना है कि गत वर्ष भी किसानों की फसलें खराब हुई थी। किसानों ने बीमा करवाया, लेकिन कुछ नहीं मिला। इस वर्ष तो और भी ज्यादा सुखा है। ऐसे में सर्वे कराकर फसल खराबे का मुआवजा दिलवाए।

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अरनोद तहसील को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग
वनपुरा। क्षेत्र में मानसून की बेरुखी और बढ़ते तापमान के कारण फसलें सूखने लगी हैं। ऐसे में किसान सहित हर किसी की चिंता बढ़ रही है। बीते कई दिनों से क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण किसानों की मेहनत की खरीफ फसलें खेतों में ही पीली पड़ने लगी हैं। फसल बोने के बाद करीब 70 दिन की फसलें हो चुकी है। अब फसल पकने की स्थिति में है, लेकिन पानी की जरूरत है। ऐसे में किसानों ने मुरझाई फसलों को सूखने से बचाने के लिए सिंचाई करना शुरू कर दिया है। किसान वर्ग स्प्रींकलर व फव्वारा पद्धति से सिंचाई कर रहे है। कहीं रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिए मंदिरों में हवन पूजन कर बारिश की प्रार्थना भी की जा रही है। वहीं इस वर्ष पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होने के कारण कुओं में भी पानी कम है। पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिससे पर्याप्त सिंचाई भी नहीं हो पा रही है। हालात यह है कि बारिश के मौसम में ग्रीष्म ऋतु जैसे हालात बने हुए हैं। जिले को सूखा घोषित करने की मांग उठ रही है।

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