
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
इलाहाबाद. हाईकोर्ट इलाहाबाद ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा आईआईटी कानपुर के चार प्रोफेसरों के खिलाफ कार्रवाई करने की संस्तुति के आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने यह रोक आयोग के इस आदेश को क्षेत्राधिकार से बाहर मानते हुए लगायी है। यही नहीं कोर्ट ने आयोग को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में उनसे जवाब तलब किया है। कोर्ट ने संस्थान के निदेशक को नियमानुसार इन प्रोफेसरांे के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की छूट दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी तथा न्यायमूर्ति अशोक कुमार की खण्डपीठ ने आईआईटी प्रोफेसर ईशान्त शर्मा व तीन अन्य की याचिका पर दिया है।
मालूम हो कि सहायक प्रोफेसर एस.सदरेला ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को शिकायत कर इन प्रोफेसरों द्वारा उत्पीड़न की बात कही थी। आयोग ने सहायक प्रोफेसर एस.सदरेला की शिकायत पर संज्ञान लेकर इन चारों प्रोफेसरों के खिलाफ सुनवाई का अवसर दिये बगैर कार्रवाई करने की डायरेक्टर को संस्तुति भेजी थी और कहा था कि आरोपियों को निलंबित किया जाए। इनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने का भी आदेश दिया था। अपनी संस्तुति में आयोग ने इन चारों प्रोफेसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को भी कहा था।
यही नहीं आयोग ने मानव संसाधन मंत्रालय के सचिव को भी यह निर्देश दिया था कि वह एक प्रोफेसर राजीव शेखर जिन्हें आईआईटी धनबाद का डायरेक्टर नियुक्त किया जा रहा है, उनकी तैनाती डायरेक्टर पद पर न की जाए। आयोग के इस आदेश को चारों प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस याचिका पर कोर्ट ने आयोग के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि आयोग को इस प्रकार की संस्तुति भेजने का कोई अधिकार नहीं है। आयोग ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर संस्तुति की है। कोर्ट इस याचिका पर आठ सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।
By Court Correspondence
Published on:
19 Apr 2018 01:58 pm
बड़ी खबरें
View Allप्रयागराज
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
