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कांग्रेस नेता हेमवती नंदन बहुगुणा ने अटल बिहारी बाजपेयी को नैनी जेल में कराया था पांच दिनों तक कैद ,यह थी वजह…

देश की सबसे सुरक्षित जेल की बैरक नंबर पांच में काटी थी सज़ा

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इलाहाबाद:पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की खराब सेहत की खबर सुनकर देश भर में उनके लिए दुवाओं का दौर जारी है। इस बीच अटल बिहारी वाजपेई से जुड़े तमाम राजनीतिक और गैर राजनीतिक वाक़िये सामने आ रहे हैं। बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि अटल बिहारी वाजपेई को इमरजेंसी के अलावा भी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जेल में डाला था।और उस समय उन्हें देश की सबसे सुरक्षित जेलों में एक जेल में कैद किया गया था ।

सरकार कर रही थी किसानो को मजबूर
बात सन 1973 और 74 की है।उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले थे सूबे सियासी पारा चढ़ रहा था ।प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी,और हेमवती नंदन बहुगुणा मुख्यमंत्री थे। उस समय अटल बिहारी वाजपेई जनसंघ के नेता हुआ करते थे। देशभर में जनता की आवाज बनकर अटल बिहारी बाजपेई जनसंघ के मंच से सरकार का विरोध कर रहे थे।सरकार किसानों को सरकारों दामो पर गेहूं बेचने के लिए मजबूर कर रही थी । जबकि पुरे प्रदेश फसल अच्छी हुई थी। इसके बावजूद सरकार का आदेश था की सभी किसानो का सरकारी मूल्यों पर गेहूं बेचना अनिवार्य है।

देश की सत्ता में मची थी खलबली
जनसंघ ने सरकार के खिलाफ देश भर में गेहूं की लेवी आंदोलन शुरु किया।उत्तर प्रदेश में जिसकी अगुवाई अटल बिहारी बाजपेई के हाथो में थी।इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता रामाधीन सिंह बताते हैं कि उस आंदोलन मैं अटल बिहारी बाजपेई के साथ हजारों लोग सड़क पर उतर आए ।लखनऊ की सड़कों पर सरकार विरोधी नारे लगने लगे देश की सत्ता में खलबली मच गई थी।

गेहूं की लेवी आंदोलन का किया था नेतृत्व
गेहूं की लेवी आंदोलन का नेतृत्व करते हुए अटल बिहारी बाजपेई ने कहा कि सरकार गरीब किसान मजदूरों को अपना अनाज बेचने के लिए सरकार मजबूर नहीं कर सकती ।रामाधीन सिंह ने बताया कि सरकार अनाज भंडार के लिए देशभर में गेहूं खरीद करवा रही थी ।जो सरकारी दामों पर खरीदा जा रहा था और बाजार की कीमत से बहुत कम था।सरकार का कहना था की किसानो के खेतों में अगर एक कुंटल भी गेहूं पैदा हुआ है।उसमें से आधा बेच दिया जाए जिसका किसान विरोध कर रहे थे।

लखनऊ से हुई थी गिफ्तारी
इस आंदोलन में अटल बिहारी बाजपेई को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया गया ।पुलिस ने बल प्रयोग किया लेकिन अटल बिहारी वाजपेई के साथ सड़कों पर उतरे नौजवान किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।आन्दोलन में संख्या इतनी ज्यादा थी कि उन्हें वहां के स्थानीय जेल में नहीं रखा जा सकता था।उस समय अटल बिहारी वाजपेई को देश की सबसे सुरक्षित जिलों में से एक नैनी जेल लाया गया।जहाँ पहले से ही विवि के अध्यक्ष रामाधीन सिंह अपने साथी के साथ बंद थे।

एक साथ बनता था 502 लोगो का खाना
उन्होंने बताया कि अटल जी समेत पांच सौ लोगो को नैनी जेल की पांच नंबर बैरिक में रखा गया ।जिसमें पहले से रामाधीन सिंह और उनके एक साथी बंद थे। नैनी जेल में अटल बिहारी बाजपेई को 5 दिन तक बंद रहे।जिसके बाद उनकी जमानत हुई उस दौरान रामाधीन सिंह भी उनके साथ रहे ,उस दौरान अटल जि के निजी सहयोग और उनकी मदद का काम रामाधीन सिंह के पास रहा। उस समय बैरक नंबर पांच में 502 लोगो का खाना एक साथ बनता था।देश में चल रही सरकारी तानाशाही के खिलाफ तमाम गंभीर मुद्दों पर अटल बिहारी वाजपेई गहन चिंतन करते हुए लोगों से चर्चा करते थे।

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