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Atiq Ashraf Murder: चांद बाबा की लाश पर पैर रख बाहूबली बना था अतीक, 17 की उम्र में ही दिखा दिया था असली रूप

Atiq Ashraf Murder: माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या हो गई है। प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल के पास अज्ञात हमलावरों ने गोलियां बरसाकर हत्या कर दी है। विधायक राजू पाल मर्डर केस के गवाह उमेश पाल की हत्या अतीक के लिए काल बन गई। आइए जानतें है अतीक के बारे में…

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70 के दशक का आखिरी साल चल रहा था। इलाहाबाद के चकिया का रहने वाला एक लड़का 10वीं में फेल हो गया। साल 1979 में 17 साल का अतीक 10वीं कक्षा में फेल हो गया। लूट, अपहरण और रंगदारी वसूलने जैसी वारदातों को अंजाम देने लगा। उसी वक्त उस पर एक हत्या का केस दर्ज हुआ।

उस समय इलाहाबाद के पुराने शहर में चांद बाबा का खौफ हुआ करता था। पुलिस और राजनेता चांद बाबा से परेशान से थे। ऐसे में अतीक अहमद को दोनों का साथ मिला। 7 सालों में अतीक चांद बाबा से भी ज्यादा खतरनाक हो गया था। लूट, अपहरण और हत्या जैसी खौफनाक वारदातों को लगातार अंजाम देने लगा।

1986 में पहली बार हुआ गिरफ्तार
जिस अतीक को पुलिस ने शह दे रखी थी, अब वही उसकी आंख की किरकिरी बन गया।1986 में पुलिस उसे गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, अतीक अपने रसूख का इस्तेमाल किया और जेल से बाहर आ गया।

1989 में राजनीति में उतरा था अतीक
अपराध की दुनिया में अतीक अब बड़ा नाम बन चुका था। साल 1989 में राजनीति में उतरा और शहर की पश्चिमी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इस बार मुकाबला था चिर प्रतिद्वंद्वी चांद बाबा से था। ऐसे में गैंगवार तो होना ही था। इसमें भी अतीक ने बाजी मारी और अपनी दहशत के चलते चुनाव जीत गया। कुछ महीनों बाद बीच चौराहे पर दिनदहाड़े चांद बाबा की हत्या हो गई। अब तो पूरे पूर्वांचल में अपराधी अतीक के नाम का बोलबाला था।

1991 और 1993 में भी अतीक निर्दलीय चुनाव जीता
साल 1991 और 1993 में भी अतीक निर्दलीय चुनाव जीता। साल 1995 में लखनऊ के चर्चित गेस्ट हाउस कांड में भी अतीक का नाम सामने आया। साल 1996 में सपा के टिकट पर विधायक बना। साल 1999 में अपना दल के टिकट पर प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ा और हार गया। फिर 2002 में अपनी पुरानी इलाहाबाद पश्चिमी सीट से 5वीं बार विधायक बना।


कई खौफनाक वारदातों के बाद अतीक का खौफ इतना ज्यादा बढ़ गया कि इलाहाबाद की शहर पश्चिमी सीट से कोई नेता चुनाव लड़ने को तैयार नहीं होता था। पार्टियां टिकट देती भी थीं तो नेता लौटा दिया करते थे। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में अतीक अहमद सपा के टिकट पर UP की फूलपुर सीट से चुनाव जीतता है। उस वक्त अतीक इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक था।

सांसद बनने पर छोड़नी पड़ी थी विधायकी
सांसद बनने पर विधायकी छोड़नी पड़ी। उपचुनाव हुआ। सपा ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को उम्मीदवार बनाया। इसी बीच अतीक का दायां हाथ माने जाने वाले राजू पाल ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। अक्टूबर 2004 में राजू पाल चुनाव जीत जाता है। पहली बार अतीक को अपने ही इलाके में टक्कर मिली। अब बात रसूख की थी।

राजू पाल की हत्या में था नामजद
विधायक बनने के 3 महीने बाद 15 जनवरी 2005 को राजू पाल ने पूजा पाल से शादी कर ली। शादी के ठीक 10 दिन बाद 25 जनवरी 2005 को राजू पाल की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में अतीक अहमद और अशरफ का नाम सामने आया।


साल 2005 में विधायक राजू पाल हत्याकांड के बाद अतीक अहमद का बुरा वक्त शुरू हो गया। साल 2007 में UP की सत्ता बदली। मायावती सूबे की मुखिया बन गईं। सत्ता जाते ही सपा ने अतीक को पार्टी से बाहर निकाल दिया। CM बनते ही मायावती ने ऑपरेशन अतीक शुरू किया। 20 हजार का इनाम रख कर अतीक को मोस्ट वांटेड घोषित किया गया।

100 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे अतीक पर
अतीक अहमद पर 100 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या की कोशिश, किडनैपिंग, रंगदारी जैसे केस हैं। उसके ऊपर 1989 में चांद बाबा की हत्या, 2002 में नस्सन की हत्या, 2004 में मुरली मनोहर जोशी के करीबी BJP नेता अशरफ की हत्या, 2005 में राजू पाल की हत्या का आरोप है।


लगातार दर्ज हो रहे मुकदमों के कारण उसके राजनीतिक करियर पर भी फुल स्टॉप लगने लगा। 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव के वक्त अतीक अहमद जेल में ही था। साल 2012 में उसने चुनाव लड़ने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी। हालांकि हाईकोर्ट के 10 जजों ने केस की सुनवाई से ही खुद को अलग कर लिया। 11वें जज ने सुनवाई की और अतीक अहमद को जमानत मिल गई।


चुनाव में अतीक अहमद की हार हुई। उसे राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने हरा दिया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उसने समाजवादी पार्टी के टिकट पर श्रावस्ती सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन BJP के दद्दन मिश्रा से हार गया।

इसके बाद 2019 के आम चुनाव में जेल से ही वाराणसी सीट पर मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा। इस बार फिर जमानत जब्त हो गई।


वहीं, जब यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी, तो अतीक अहमद के बुरे दिन शुरू हो गए. एक व्यापारी को जेल में धमकी देने और पिटाई का वीडियो वायरल हुआ तो अतीक फिर गिरफ्तार हुआ और उसे गुजरात की साबरमती जेल में भेज दिया गया।


आपको बात दें कि बीएसपी विधायक राजू पाल के हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की सरेआम 24 फरवरी को धूूमनगंज थाना क्षेत्र में गोलियों और बमबाजी से हमला कर हत्या कर दी गई थी। इस कांड के पीछे उमेश की पत्नी जया पाल ने अतीक अहमद के परिवार पर मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में अतीक, अशरफ, अतीक के बेटे असद, उसकी पत्नी शाइस्ता समेत उनके गुर्गों पर मुकदमा दर्ज कराया गया. पुलिस ने एनकाउंटर में असद को 13 अप्रैल को मार गिराया, इसके साथ ही गुर्गा गुलाम भी मारा गया। वहीं, 15 अप्रैल को असद को प्रयागराज में ही दफनाया गया। इसी रात अतीक और अशरफ को अज्ञात बदमाशों ने मार गिराया.