
अतीक अहमद ने 1989 से 2022 तक लगातार इलाहाबाद पश्चिम से चुनाव जीता
प्रयागराज में हुई उमेश पाल की हत्या में पूर्व सांसद अतीक अहमद का नाम सामने आ रहा है। उमेश के परिवार ने जेल में बंद अतीक के खिलाफ नामजद रिपोर्ट की है। साथ ही खुलकर ये कहा है कि उमेश की हत्या की वजह सिर्फ और सिर्फ अतीक से उसकी दुश्मनी थी।
अतीक के सामने बीते 40 सालों में काफी लोग आए लेकिन उससे टकराने वाले ज्यादातर लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। ये भी दिलचस्प बात है कि अतीक के दुश्मनों की हत्याएं बीच बाजार होती रही हैं। ये चांद बाबा से उमेश पाल तक देखने को मिली है। वो चांद बाबा ही था, जिससे अतीक की पहली खूनी गैंगवार हुई थी।
चांद बाबा के गैंग से भिड़ा अतीक
प्रयागराज के चकिया में पैदा हुए अतीक अहमद ने दसवीं में फेल के होने के बाद अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था। साल 1979 में 17 साल की उम्र में अतीक अहमद पर कत्ल का पहला मुकदमा लगा। इसके बाद तो उसने इतनी तेजी से अपराध की दुनिया में कदम बढ़ाए कि 1985 आते-आते वो प्रयागराज ही नहीं आसपास के जिलों में भी पैर पसारने लगा था।
चकिया और आसपास 1970 के दशक में चांद बाबा गैंग का दबदबा था। पूरे शहर से चांद बाबा रंगदारी वसूलता था। 1980 के दशक में अतीक उसके सामने खड़ा हो गया तो दोनों के गैंग में आए दिन टकराव होने लगा।
चांद और अतीक दोनों राजनीति में आए
चांद बाबा और अतीक दोंनो ही अपराध की दुनिया से राजनीति में जाने की कोशिश में लगे थे। साल 1989 का विधानसभा का इलेक्शन आया और दोनों चुनाव में उतर गए। चांद बाबा हार गया और अतीक अहमद विधायक बन गया।
1989 के नतीजों के कुछ दिन बाद ही चांद बाबा की हत्या हुई। शहर में दिनदहाड़े और सरे बाजार चांद बाबा को मौत के घाट उतार दिया गया। हत्या का आरोप लगा उस समय के विधायक अतीक अहमद पर। चांद बाबा की हत्या के बाद ये पूरा गैंग खत्म हो गया और पूरे इलाके का अकेला डॉन बन गया अतीक अहमद।
चांद बाबा के बाद राजू पाल से मिली अतीक को चुनौती
साल 2002 में अतीक पर नस्सन तो साल 2004 में भाजपा नेता अशरफ की हत्या का आरोप लगा। इस सबके बावजूद उसके राजनीतिक रुतबे में कमी नहीं आई। चांद बाबा की हत्या के बाद इलाहाबाद पश्चिम से, 1989 से 2002 तक, 5 बार अतीक अहमद विधायक बना। कभी भी उसको कोई गंभीर चुनौती इस सीट पर नहीं मिली।
अतीक को इलाहाबाद पश्चिम सीट पर झटका मिला 2004 में। 2004 में अतीक को सपा ने फूलपुर से टिकट दिया और वो सांसद बन गया। सांसद बनने के बाद अतीक ने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया और सपा के टिकट पर उतारा अपने भाई अशरफ को।
2004 के आखिर में हुए उपचुनाव में अशरफ के सामने किसी समय अतीक के खास रहे राजू पाल बसपा से उतरे। राजूपाल की भी अच्छी दबंगई थी लेकिन सबको लगता था कि अतीक के सामने क्या ही लड़ेगा। नतीजे आए तो इलाहाबाद पश्चिम पर 15 साल का अतीक का दबदबा टूट गया।
राजूपाल की हत्या फिल्मी अंदाज में हुई
राजूपाल ने अशरफ को हराया तो प्रयागराज में उसको अतीक के सामने खड़ा किया जाने लगा। नए नए विधायक राजू पाल 25 जनवरी 2005 को एसआरएन हॉस्पिटल से निकले। क्वालिस चला रहे राजूपाल के सामने सुलेमसराय में जीटी रोड पर एक स्कोर्पियो रुकी।
राजूपाल की कार के सामने रुकी स्कॉर्पियो से 5 हथियारबंद उतरे और गोलियां बरसानी शुरू कर दी। राजू को 19 गोलियां लगीं, जिसमें उनकी जान चली गई। उनके साथ बैठे संदीप यादव और देवीलाल की भी गोली लगने से मौत हो गई। ये हमला भी बीच बाजार और दिन के उजाले में हुआ था। इस हत्या में अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ आरोपी है। इस मामले में राजूपाल की पत्नी पूजा वादी हैं तो वहीं उमेश पाल मुख्य गवाह बने।
उमेश को भी दिनदहाड़े ही मारा गया
3 दिन पहले शुक्रवार को प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या हुई है। उमेश की हत्या के कई वीडियो हमारे सामने आए हैं। इसमें देख सकते हैं कि किस तरह से उनको दिन के करीब 5 बजे बीच बाजार ट्रैफिक के बीच मारा गया है।
उमेश पाल ने अतीक को चुनावी चुनौती तो नहीं दी थी लेकिन राजूपाल राजूपाल हत्याकांड में वो अतीक के सामने अड़े हुए थे। उमेश पाल लगातार राजूपाल केस में लड़ रहे थे। ऐसे में उनका लगातार अतीक से टकराव था। उनको भी दिनदहाड़े मार दिया गया। इस हत्या में भी जेल में बंद अतीक नामजद है।
Updated on:
27 Feb 2023 02:20 pm
Published on:
27 Feb 2023 01:45 pm
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