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भोजपुरी भाषा में बीएचयू के छात्र ने लिखा रिसर्च पेपर, पिता का सपना किया पूरा

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नाम एक और उपलब्धि दर्ज हो गई है। वहां के एक स्टूडेंट ने भोजपुरी भाषा में रिसर्च पेपर लिखा है।

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यूपी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय भोजपुरी स्डटी सेंटर में रिसर्च करने वाले छात्र धीरज कुमार गुप्ता ने जर्नलिज्म के एक टॉपिक ‘भोजपुरी पत्रकारिता का उदभव और विकास-एक अध्ययन’ पर 235 पेजों का रिसर्च पेपर भोजपुरी में लिखा है। इसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय देश का पहला केंद्रीय विश्वविद्यालय भी बन गया है

पिता के सपने को धीरज ने किया पूरा
मूल रूप से खोजवा निवासी धीरज कुमार गुप्ता 4 बहन-भाई हैं, जिसमें वह सबसे बड़े हैं। 2019 में पिता का निधन हो गया था। पूरे-परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं पर आ गई थी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनके पिता का सपना था कि धीरज अपनी आगे की पढ़ाई भोजपुरी में ही पूरी करें।जिस वजह से धीरज ने भोजपुरी भाषा में लिखना जारी रखा।

भोजपुरी स्डटी सेंटर में उन्होंने अपना पेपर भोजपुरी में लिखकर जमा कराया है। यह काशी विश्वविद्यालय में पहली बार हुआ है। धीरज ने भोजपुरी में लिखकर इतिहास रचा है।

छात्र हिंदी और इंग्लिश में ही रिसर्च पेपर लिखते हैं।
2009 में बना एक भोजपुरी स्टडी सेंटर एक अनुशासनिक केंद्र हैं। यहां पर पढ़ रहे सभी रिसर्च के छात्र मान्यता प्राप्त किसी भी भाषा में रिसर्च पेपर लिख सकते हैं। ज्यादातर बच्चे हिंदी, अंग्रेजी में ही पेपर लिखते हैं। लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है।

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भोजपुरी स्टडी सेंटर में पढ रहे धीरज ने अपना पूरा रिसर्च पेपर भोजपुरी भाषा में ही लिखा है। 30 दिसंबर को धीरज ने अपना रिसर्च पेपर जमा कर दिया है। अब कुछ औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद उसे डिग्री का इंतजार है।