
प्रयागराज में उमेश पाल हत्याकांड के बाद से जांच एजेंसियां लगातार गुड्डू मुस्लिम की तलाश कर रही हैं, लेकिन अभी तक उसका पता नहीं चल सका है। एक कयास ये भी है कि गुड्डू मुस्लिम ने अतीक अहमद के साथ दगाबाजी की। इसीलिए वो अभी तक बचा हुआ है, जबकि असद का एनकाउंटर हो गया। इन सब कयासों के बीच आइए जानते हैं कैसा रहा है गुड्डू मुस्लिम का अतीत।
पुलिस के डोजियर के मुताबिक, गुड्डू मुस्लिम उर्फ मोहम्मद मुस्लिम उर्फ गुड्डू शूटर के पिता का नाम शफीक था, जो जिला सुल्तानपुर के गोंसाईगंज थाना क्षेत्र के इटकौली गांव के रहने वाले थे। अपने पिता अल्ताफ की मौत के बाद शफीक 6 साल के गुड्डू को लेकर अपने साले के घर प्रयागराज के थाना शिवकुटी के लाला की सराय इलाके में बस गए थे। हालांकि 15 साल की उम्र में ही उसने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। इसके बाद उसका खौफ कायम हो गया।
अपराध के रास्ते पर जाने पर घर वालों ने भेज दिया लखनऊ
स्थानीय लोग बताते हैं कि जब गुड्डू अपराध के रास्ते पर चलने लगा तो घरवालों ने उसे लखनऊ भेज दिया। इसी दौरान वह फैजाबाद के हिस्ट्रीशीटर सत्येंद्र सिंह की गैंग से शामिल हो गया। सत्येंद्र जब भी बड़े अपराध को अंजाम देने की प्लानिंग करता था तो उसमें गुड्डू जरूर शामिल होता था।
सत्येंद्र सिंह का था खास आदमी
1997 में एक दिन सत्येंद्र अपने गुड्डू मुस्लिम के साथ घर से निकला। गुड्डू मुस्लिम गाड़ी की अगली सीट पर बैठा था। कुछ दूर चलने के बाद गाड़ी रुकी और गुड्डू उतरकर आगे खड़ी गाड़ी में बैठ गया। जैसे ही गुड्डू की गाड़ी 100 मीटर आगे बढ़ी तभी सत्येंद्र की गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। AK-47से हुई इस गोलीबारी में सत्येंद्र सिंह मारा गया। जबकि गुड्डू बाल-बाल बच गया। इसके बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया कि गुड्डू मुस्लिम ने ही सत्येंद्र सिंह की मुखबिरी की थी। इस हत्या का आरोप श्रीप्रकाश शुक्ला पर लगा था।
हत्या से पहले गुड्डू के साथ घर से निकला था संतोष
1996 में गुड्डू मुस्लिम की दोस्ती अयोध्या के सरायरासी गांव के संतोष सिंह से हुई। संतोष के पास उस समय मारुति कार और राइफल हुआ करती थी। गुड्डू अक्सर राइफल लेकर संतोष के साथ घूमते हुए देखा जाता था। ऐसा कहा जाता है कि हिस्ट्रीशीटर सत्येंद्र सिंह की जिस दिन हत्या हुई थी, उस दिन भी गुड्डू मुस्लिम सत्येंद्र की गाड़ी से उतरकर संतोष की ही गाड़ी में ही बैठा था।
इसी वक्त गुड्डू मुस्लिम ने संतोष सिंह की मुलाकात लखनऊ में बाहुबली धनंजय सिंह और बाहुबली अभय सिंह से कराई। एक दिन गुड्डू मुस्लिम के साथ संतोष लखनऊ के लिए निकला, लेकिन घर नहीं लौटा। अगले दिन उसका शव रायबरेली में मिला था। उस वक्त संतोष सिंह की हत्या में भी गुड्डू मुस्लिम का ही हाथ होने की चर्चा थी।
श्रीप्रकाश शुक्ला की गैंग में हुआ शामिल
सत्येंद्र सिंह की हत्या के बाद से ही गुड्डू मुस्लिम श्रीप्रकाश शुक्ला के करीब आ गया था। जुलाई 1997 में राज्य निर्माण निगम के इंजीनियर को लखनऊ में बीच सड़क पर गोलियों से भून दिया गया। इस हत्या का आरोप गुड्डू मुस्लिम पर लगा था।
बड़े-बड़े सरकारी टेंडर कब्जियाने के दौरान गुड्डू की मुलाकात UP के दुर्दांत अपराधी रहे श्रीप्रकाश शुक्ल से हुई। धीरे-धीरे वह श्रीप्रकाश शुक्ला की गैंग में शामिल हो गया। शुक्ला गैंग में शामिल होने के बाद गुड्डू और भी ज्यादा खतरनाक होता गया। हर बड़ी वारदात में उसे श्रीप्रकाश शुक्ला का साथ मिलने लगा था। गुड्डू श्रीप्रकाश को अपना गुरु मानने लगा था। इसके बाद गुड्डू ने रियल एस्टेट कारोबार में भी खूब पैसा कमाया। गुड्डू अक्सर श्रीप्रकाश के साथ होता था।
एनकाउंटर में मारा गया श्रीप्रकाश शुक्ला
23 अक्टूबर 1998 को इनपुट मिलते ही STF ने दिल्ली में इंदिरापुरम के सुनसान इलाके में एक नीली कार को घेर लिया। इस कार में अपने दो साथियों के साथ श्रीप्रकाश शुक्ला बैठा था। उसे सरेंडर करने को कहा गया, लेकिन वह नहीं माना और फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस की जवाबी फायरिंग में श्रीप्रकाश मारा गया। हालांकि इस बार भी गुड्डू मुस्लिम बच गया। ऐसा माना जाता है कि STF को गुड्डू मुस्लिम से ही श्रीप्रकाश शुक्ला का इनपुट मिला था।
जेल से छुड़वाने के बाद अतीक के करीब आया गुड्डू
2001 में खुफिया सूचना पर गोरखपुर पुलिस गुड्डू मुस्लिम को पटना के बेऊर जेल के पास से गिरफ्तार लिया। अतीक ने तब गुड्डू को जमानत पर जेल से बाहर निकलवाया। अब गुड्डू अतीक का खासमखास बन गया। 2005 में प्रयागराज पश्चिमी के विधायक राजू पाल की हत्या हो गई। UP के सीनियर पुलिस अधिकारी बताते हैं कि गुड्डू ने राजू पाल पर हथगोला उसी तरह फेंका, जिस तरह उसने इस साल फरवरी में राजू पाल मामले के प्रमुख गवाह उमेश पाल की हत्या के दौरान फेंका था।
गुड्डू पर लग रहे अतीक से दगाबाजी के आरोप
13 अप्रैल को UP STF को जानकारी मिली कि गुड्डू मुस्लिम, असद और गुलाम झांसी में हैं। यहां एनकाउंटर में असद और गुलाम मारे गए। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि गुड्डू मुस्लिम ने खुद को बचाने के लिए ही STF तक असद और गुलाम के लोकेशन की जानकारी भेजी थी।
इसके दो दिन बाद 15 अप्रैल को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई। "मेन बात ये है कि गुड्डू मुस्लिम...' अतीक अहमद का भाई अशरफ अपनी बात पूरी करता, इससे पहले ही शूटर्स ने दोनों भाइयों पर गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद लोग पूछने लगे कि आखिर गुड्डू मुस्लिम के बारे में अशरफ क्या बताने जा रहा था? इसके बाद फिर एक एक कयास ये लगाए जाने लगा कि गुड्डू मुस्लिम ने अतीक अहमद के साथ दगाबाजी की। इसीलिए वो अभी तक बचा हुआ है।अब उमेश पाल हत्याकांड का 'बमबाज' गुड्डू मुस्लिम भी सवालों के घेरे में है।
Published on:
30 Apr 2023 10:55 pm
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