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गंगा दुनिया की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक, इसे प्रदूषण मुक्त करना जरूरी: हाईकोर्ट

इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad Highcourt) ने कहा कि गंगा नदी (Ganga River) को पुनर्जीवित करने और उसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।

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Ganga River in Varanasi

प्रयागराज. साल 2014 में वाराणसी संसदीय सीट से निर्वाचित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मां गंगा (River Ganga) को स्वच्छ करने का प्रण लेते हुए कहा था कि मां गंगा की सेवा करना उनकी नियति है। मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad Highcourt) ने उसी बयान का जिक्र करते हुए कहा कि नदी को पुनर्जीवित करने और उसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति रितु राज अवस्थी और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने गंगा नदी के इतिहास व हिंदू पौराणिक कथाओं में इसके महत्व को समझाते हुए कहा कि राष्ट्र की जीवन रेखा होने, पूजे जाने, एक बड़ी आबादी को जीविका प्रदान करने के बावजूद समय के साथ गंगा नदी अत्यधिक प्रदूषित हो गई है। अध्ययनों के अनुसार, यह दुनिया की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि राष्ट्र का भविष्य काफी हद तक नदी के स्वास्थ्य पर निर्भर करेगा।

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यह है मामला-
गंगा को साफ करने का कार्यक्रम एनएमसीजी (नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश में यूपी जल निगम को नमामि गंगे परियोजना की कार्यकारी एजेंसी के रूप में चुना गया था। इस परियोजना के लिए बिडर्स आमंत्रित किए गए थे। कुल 8 बिडर्स ने इसमें आवेदन किया था। इसमें याचिकाकर्ता भी शामिल था। इनमें से सिर्फ एक को चुना गया था, लेकिन बाद में यूपी जल निगम ने इस टेंडर को ही रद्द कर दिया था। हालांकि एनएमसीजी ने यूपी जल निगम को इसे प्रभावी न करने को कहा और सभी बिडर्स को खुद दोबारा परखा और दो को चुना। इस बार भी याचिकाकर्ता को अयोग्यता के आधार पर नहीं चुना गया। याचिकाकर्ता ने खुद के न चयन होने पर तो कोई याचिका दायर नहीं की, पर एनएमसीजी के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उसने यूपी जल निगम को गंगा साफ करने के लिए आमंत्रित किए गए टेंडर के लिए बोली रद्द करने के आदेश को प्रभावी न करने का निर्देश दिया था।

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परियोजना को लागू करने में देरी से बढ़ेगी लागत : कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि मिशन नमामि गंगे का बहुत बड़ा सार्वजनिक महत्व है। परियोजना को लागू करने में देरी से न केवल लागत बढ़ेगी बल्कि गंगा की सहायक नदी गोमती में प्रदूषण के स्तर को कम करने और कम करने के उद्देश्य में बाधा उत्पन्न होगी। कोर्ट न उत्तरदाताओं को ईमानदारी और मुस्तैदी से कार्य करने के साथ आगे बढ़ने के लिए निर्देशित किया ताकि गोमती नदी में प्रदूषण को नियंत्रित और कम किया जा सके। इससे परिणामस्वरूप गंगा नदी में प्रदूषण भी कम हो जाएगा, जो 'नमामि गंगे मिशन का मुख्य उद्देश्य है।