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हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, अधिकृत वकील को पेशेवर फीस का अधिकार

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि यदि किसी विभाग ने अपने मुकदमों के लिए अधिवक्ता नामित किया है और उस अधिवक्ता ने न्यायालय में उपस्थित होकर पक्ष रखा है तो नियमानुसार उस अधिवक्ता को फीस पाने का अधिकार है। विभाग फीस देने से इनकार नहीं कर सकता।

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Allahabad High Court: कोर्ट ने डीएम जौनपुर को निर्देश दिया कि गांव सभा के पैनल अधिवक्ता (याची) के बकाया बिलों पर पुनर्विचार कर भुगतान की कार्यवाही पूरी करें। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ एवं न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित की खंडपीठ ने अधिवक्ता मनोज कुमार यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने गांव सभा के अधिवक्ता को फीस का भुगतान करने से इनकार करने के डीएम जौनपुर का आदेश रद्द कर दिया है।

याची के अधिवक्ता आलोक कुमार यादव का कहना था कि याची को गांव सभा का पैनल अधिवक्ता नामित किया गया। उसे गांव सभा की ओर से नोटिस लेने व प्रतिवाद करने के लिए अधिकृत किया गया। ऐसे में अधिवक्ता कोर्ट में मौजूद रहे तो उसे फीस देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

जौनपुर से नहीं हुआ भुगतान

यह भी कहा वाराणसी, गाजीपुर व चंदौली के जिलाधिकारियों ने याची के बिलों का भुगतान कर दिया है, जौनपुर के डीएम भुगतान नहीं कर रहे हैं। जिसके लिए याचिका की गई।

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याची ने की थी फीस भुगतान की मांग

याची ने 4,12,275 रुपये 18 फीसदी ब्याज सहित बकाया अधिवक्ता फीस भुगतान करने की मांग की थी। याची को 16 मई 2013 को चार जिलों की गांव सभा का पैनल अधिवक्ता नियुक्त किया गया था। उसे 27 दिसंबर 2019 को हटा दिया गया। कोर्ट ने कहा कि याची ने उन केसों जिसमे गांव सभा पक्षकार थी, प्रोफेशनल कार्य किया है, जिसके लिए उसे अधिकृत किया गया था। भले ही केस से गांव सभा का सीधा सरोकार नहीं था, फिर भी अधिवक्ता ने अपना काम किया है इसलिए उसे फीस पाने का अधिकार है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता।