
अतीक अहमद की खौफनाक कहानी Source- X
Atiq Ahmed Story: उत्तर प्रदेश में अपराध और सियासत का गठजोड़ दशकों तक राज्य को काफी नुकसान पहुंचाता रहा। माफिया लोग खुलेआम अपराध करते थे क्योंकि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिला हुआ था। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और वर्तमान राज्यसभा सांसद बृजलाल ने अतीक अहमद जैसे माफिया के काले कारनामों की परतें खोली हैं। उनके बयानों से पता चलता है कि अतीक सिर्फ एक अपराधी नहीं, बल्कि क्रूरता का प्रतीक था, जिसे राजनीतिक पनाह हासिल थी।
हाल में एक मीडिया हउस से बात करते हुए बृजलाल बताते हैं कि अतीक अहमद ने अपने दुश्मनों को तड़पाने के लिए एक खास टॉर्चर चैंबर बना रखा था। वहां वह चाबुक से विरोधियों की चमड़ी उधेड़ देता था। जब व्यक्ति बहुत दर्द सह लेता और अधमरा हो जाता, तब अतीक उसे गोली मारकर मौत दे देता था। उस दौर में पुलिस के हाथ बंधे हुए थे। माफिया के हौसले बहुत बुलंद थे। लोग डर के मारे कुछ बोल नहीं पाते थे।
अतीक अहमद की अपराध की कहानी साल 1979 में शुरू हुई। महज 17 साल की उम्र में उसने मोहम्मद इस्लाम की हत्या कर दी। इससे वह जरायम की दुनिया में कदम रख चुका था। 1983 में उसने दूसरा मर्डर किया। फिर ठेकेदारी और रंगदारी का धंधा शुरू कर दिया। 1985 के आसपास अतीक को समझ आ गया कि अगर सत्ता का सहारा मिल जाए, तो पुलिस उसे कुछ नहीं बिगाड़ सकती। उसका गुरु चांद बाबा उर्फ शौकत इलाही था। जब गुरु ने चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो चेला अतीक ने उसे रास्ते से हटाने की ठान ली। साल 1989 में अतीक ने अपने ही गुरु चांद बाबा की दिनदहाड़े हत्या कर दी। इस हत्या ने प्रयागराज में अतीक के नाम का खौफ फैला दिया। यहीं से उसके माफिया राज का परचम लहराने लगा।
बृजलाल साफ आरोप लगाते हैं कि बिना सरकारी पनाह के कोई भी अपराधी बड़ा माफिया नहीं बन सकता। 1996 में जब अतीक अहमद सपा में शामिल हुआ, तो उसे अपराध करने का खुला लाइसेंस मिल गया। अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव की सरकारों के दौरान माफिया को पूरा संरक्षण मिला। अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और शहाबुद्दीन जैसे अपराधियों का त्रिकोण बन गया। इनके पास आधुनिक हथियार थे, जो उस समय पुलिस के पास भी नहीं होते थे। सत्ता की सरपरस्ती इतनी मजबूत थी कि अतीक विधायक और सांसद रहते हुए भी बेखौफ हत्याएं करता रहा। अशरफ, सभासद पन्नू और राजू पाल जैसी कई हत्याएं इसी दौर की हैं। सरकारी मशीनरी इन माफियाओं के सामने नतमस्तक रहती थी।
राजू पाल की हत्या अतीक के घमंड को चोट पहुंचाने वाली घटना थी। अतीक को लगता था कि उसका भाई अशरफ आसानी से चुनाव जीत जाएगा। लेकिन एक छोटे कार्यकर्ता राजू पाल ने उसे हरा दिया। यह हार अतीक बर्दाश्त नहीं कर सका। इंटेलिजेंस ने पहले ही चेतावनी दी थी कि राजू पाल की जान खतरे में है। पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर सुरक्षा मांगी गई थी। फिर भी समाजवादी सरकार ने सिर्फ दो सिपाही सुरक्षा में लगा दिए। नतीजा यह हुआ कि दिनदहाड़े राजू पाल को गोलियों से भून दिया गया। सरकार अपराधियों को बचाने और क्लीन चिट देने में लगी रही।
बृजलाल ने एक और चौंकाने वाली घटना बताई। जब वे इलाहाबाद में डीआईजी थे, तब अतीक के एक विरोधी अख्तर कचहरी आने वाला था। अतीक ने उसे मारने की फिल्मी साजिश रची। अतीक खुद डीएम के दफ्तर में जाकर बैठ गया, ताकि उसके पास एलिबाई रहे कि वह घटना के समय वहां था। डीएम का घर और कचहरी पास-पास थे। अतीक के शूटर्स ने कचहरी में अख्तर की हत्या कर दी, जबकि अतीक शान से डीएम के बगल में बैठा रहा। अतीक का खौफ इनता था कि गवाह डर के मारे चुप रहते थे, क्योंकि गवाही देने का मतलब मौत होता था।
पूर्व डीजीपी बृजलाल कहते हैं कि सपा के समय जो गुंडागर्दी चरम पर थी, उसे योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जड़ से उखाड़ फेंका। अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे बड़े माफियाओं का अंत हो गया। अब उत्तर प्रदेश माफिया विहीन हो चुका है। इन माफियाओं के राज में सिर्फ हत्याएं नहीं, बल्कि ड्रग्स और फेक करेंसी का काला कारोबार भी चलता था। विपक्षी दल भले ही झूठे आरोप लगाएं, लेकिन जनता जानती है कि ददुआ, विजय मिश्रा और फूलन देवी जैसे अपराधियों को किसने बढ़ावा दिया था। आज यूपी में पुलिस पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं है। यही वजह है कि अपराधी या तो जेल में हैं या प्रदेश छोड़कर भाग गए हैं। योगी सरकार ने कानून का राज स्थापित किया है, जिससे आम आदमी को सुरक्षा और न्याय मिल रहा है।
Published on:
28 Mar 2026 08:09 am
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