
प्रशासन ने तय किया हर घाट का किराया (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Magh Mela 2026 : प्रयागराज में लगने वाले माघ मेले को लेकर प्रशासन ने इस बार एक अहम और जनहित से जुड़ा फैसला लिया है। महाकुंभ की तरह माघ मेले के दौरान अब संगम क्षेत्र में नाव चलाने वाले नाविक श्रद्धालुओं से मनमाना किराया नहीं वसूल सकेंगे। श्रद्धालुओं की लगातार मिल रही शिकायतों और पूर्व वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने सभी नाव चालकों के लिए एक विशेष अनुमति पत्र (पास) जारी किया है, जिसमें हर घाट के लिए किराया स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। प्रशासन के इस फैसले से जहां लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं नाविकों के बीच भी व्यवस्था को लेकर स्पष्टता आएगी। अब संगम क्षेत्र में नाव पर बैठने का न्यूनतम किराया 65 रुपये और अधिकतम 150 रुपये प्रति सवारी तय किया गया है।
हर साल माघ मेले के दौरान संगम स्नान के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं। संगम तक पहुंचने के लिए नावों का इस्तेमाल सबसे प्रमुख साधन होता है। लेकिन बीते वर्षों में यह देखा गया कि कुछ नाविक श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे तय दर से कई गुना अधिक किराया वसूलते थे। कई बार तो एक सवारी से 300 से 500 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें सामने आईं। विशेषकर बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालु और बुजुर्ग लोग इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा शिकार होते थे। महाकुंभ के दौरान भी इस तरह की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े थे।
इन्हीं अनुभवों से सबक लेते हुए इस बार माघ मेले से पहले ही प्रशासन ने नाव संचालन को पूरी तरह नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। जिला प्रशासन और मेला प्रशासन ने संयुक्त रूप से एक व्यवस्था तैयार की है, जिसके तहत हर नाव चालक को प्रशासन की ओर से विशेष पत्र/पास दिया जाएगा। इस पत्र में नाव चालक का नाम, नाव का नंबर और निर्धारित घाटों का किराया दर्ज होगा। बिना इस पत्र के किसी भी नाव को संगम क्षेत्र में चलने की अनुमति नहीं होगी। तय किराए से अधिक वसूली करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी
यह किराया दूरी और घाट के आधार पर तय किया गया है। अलग-अलग घाटों के लिए अलग दरें निर्धारित की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को पहले से यह जानकारी रहे कि उन्हें कितना भुगतान करना है। प्रशासन ने घाटों पर बड़े-बड़े सूचना बोर्ड लगाने का भी निर्देश दिया है, जिन पर किराया सूची साफ-साफ लिखी होगी।
प्रशासन के इस कदम से माघ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब उन्हें नाव पर बैठने से पहले मोलभाव नहीं करना पड़ेगा और न ही लूट-पाट का डर रहेगा। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह फैसला पहले ही लागू हो जाना चाहिए था। एक श्रद्धालु ने कहा कि हर साल नाव वाले मनमाना पैसा मांगते थे। कई बार मजबूरी में ज्यादा देना पड़ता था। अगर किराया तय रहेगा तो बहुत सुविधा होगी।”
वहीं, नाविकों के बीच इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ नाविकों का कहना है कि तय किराया होने से विवाद कम होंगे और व्यवस्था बेहतर होगी। एक नाविक ने बताया कि किराया तय रहेगा तो झगड़े नहीं होंगे। कई बार कुछ लोग ज्यादा पैसे लेकर पूरे नाविक समाज को बदनाम कर देते हैं।” हालांकि कुछ नाविकों ने यह भी कहा कि महंगाई और मेहनत के हिसाब से किराया थोड़ा कम है, लेकिन प्रशासन के निर्देशों का पालन करना उनकी मजबूरी होगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल किराया तय कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पालन को सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी टीमें गठित की जाएंगी। मेला क्षेत्र में पुलिस, प्रशासन और स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमें तैनात रहेंगी, जो नाव संचालन पर नजर रखेंगी। यदि कोई नाव चालक तय किराए से अधिक वसूली करता है। बिना अनुमति पत्र के नाव चलाता है। श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार करता है,तो उसके खिलाफ जुर्माना, नाव जब्ती और अनुमति रद्द करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि यह पूरी व्यवस्था महाकुंभ में लागू किए गए मॉडल पर आधारित है। महाकुंभ के दौरान किराया निर्धारण और पास सिस्टम लागू होने से काफी हद तक अव्यवस्था पर नियंत्रण पाया गया था। उसी अनुभव को माघ मेले में भी लागू किया जा रहा है। मेला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि हमारा उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और पारदर्शी व्यवस्था देना है। माघ मेला भी करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा आयोजन है, इसलिए किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
माघ मेले को लेकर प्रयागराज प्रशासन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। संगम क्षेत्र में घाटों की मरम्मत, सफाई, सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नाव संचालन व्यवस्था को दुरुस्त करना इन्हीं तैयारियों का अहम हिस्सा है। प्रशासन का मानना है कि जब श्रद्धालुओं को उचित किराया, सुरक्षा और सुविधा मिलेगी, तभी माघ मेले की व्यवस्था सफल मानी जाएगी।
Published on:
04 Jan 2026 01:38 pm
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