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संगम नगरी में माघी पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी

40 लाख लोगों ने संगम समेत गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान किया

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40 लाख लोगों ने संगम समेत गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान किया

इलाहाबाद,संगम नगरी में माघी पूर्णिमा के पर्व पर पर गंगा, जमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। माघी पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले का अनौपचारिक समापन हो गया और कल्पवास भी आज खत्म हो गया। वैसे मेला 13 फरवरी को पड़ने वाले महाशिवरात्रि के पर्व तक जारी रहेगा। पूर्णिमा का योग मंगलवार की रात में ही प्रारम्भ हो जाने से स्नान घाटों पर स्स्नान भी भीड़ ठंड के बावजूद देर रात से जमा होने लगी थी। दिन में धूप निकलने के बाद श्रद्धालुओं का रेला संगम की ओर तेजी से बढ़ा। मेला प्रशासन के अनुसार शाम करीब पांच बजे तक 40 लाख लोगों ने संगम समेत गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान किया। स्नान के बाद लोगों ने घाटों पर पूजन-अर्चन किया और दान भी दिया। समाचार लिखे जाने तक मेला क्षेत्र और स्नान घाटों से किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं थी।

माघी पूर्णिमा स्नान के साथ ही संगम तट पर मास पर्यंत चल रहा कल्पवास का अनुष्ठान भी आज समाप्त हो गया। पौष पूर्णिमा से यहां जमे कल्पवासी अमूमन माघी पूर्णिमा स्नान के बाद अपने घर को प्रस्थान करने लगते हैं। लेकिन, इस बार चंद्रग्रहण के कारण माघी पूर्णिमा स्नान के बाद भी कल्पवासी मेला क्षेत्र नहीं छोड़ रहे हैं। आस पास के कल्पवासी ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर देर रात तक घर वापस जायेंगे। अधिकतर कल्पवासी गुरुवार की सुबह घर लौटेगे, जबकि कुछ कल्पवासी तीन फरवरी को पड़ रहे त्रिजटा पर्व का स्नान कर मेला क्षेत्र छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

वैसे अधिकतर साधु-संत, धर्माचार्य और शंकराचार्य लोग माघ मेला क्षेत्र से पहले ही जा चुके हैं। खाक चैक के वैरागी संत और दंडी बाड़ा के संन्यासी ग्रहण के बाद स्नान करके आज देर रात ही अपने - अपने आश्रम प्रस्थान कर जायेंगे। ज्योतिर्विद आचार्य अविनाश सहाय के अनुसार चंद्रग्रहण शाम 5.34 बजे लग चुका है, जो रात 8.42 बजे समाप्त होगा। ग्रहण का सूतक काल सुबह ही प्रारम्भ हो गया था। ज्योतिर्विदों का मानना है कि सूतक काल मे तीर्थस्थल छोड़ना अनुचित होता है। तीर्थ मे रहने वाले लोग ग्रहण समाप्त के बाद गंगा अथवा संगम मे स्नान करके यथासंभव दान करने के बाद ही घर जाये ंतो फलकारी होता है।

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