
श्रीकृष्ण विराजमान परिसर के सर्वे की मांग, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला जज से मांगी आख्या
प्रयागराज. Allahabad High Court सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के अध्यापकों और कर्मचारियों के लिए खुशखबरी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहाकि, 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आने वाले राजकीय वित्तीय सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत सभी शिक्षक और कर्मचारी पेंशन पाने के हकदार हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेंशन का लाभ सिर्फ उच्चतर प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों तक सीमित करने को सही नहीं माना और इस संबंध में जारी आदेश तम्काल प्रभाव से रद कर दिया।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने लाल साहब सिंह तथा अन्य की याचिका पर दिया है। हाई कोर्ट ने मान्यता प्राप्त शासकीय सहायता वाले निजी विद्यालय के अध्यापकों को उनका प्रबंधकीय अंशदान ब्याज सहित जमा करने के लिए दो माह का समय दिया है। साथ ही सरकार को आदेश दिया है कि याचीगण को पेंशन का लाभ दिया जाए।
याचीगण के वकील ने पेश किए तर्क :- याचीगण के अधिवक्ता रामकृष्ण यादव ने बुद्धि राम के मामले में हाईकोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहाकि, इस केस में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वे सभी लोग पेंशन योजना का लाभ पाने के हकदार हैं जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं। जबकि सरकारी वकील का कहना था कि 22 मई 2006 के शासनादेश से अंशदान जमा करने की कटऑफ डेट जारी की गई थी लेकिन याचियों ने नियत तिथि के भीतर अंशदान जमा नहीं किया। याचियों का कहना था की वर्ष 2006 का शासनादेश उन्हें कभी उपलब्ध ही नहीं कराया गया। उन्हें योजना की जानकारी 2017 में जारी शासनादेश से हुई और तब उन्होंने कटऑफ डेट के भीतर ही अपना अंशदान जमा करने की पेशकश की थी। वर्ष 2006 के शासनादेश से जो कटऑफ डेट जारी की गई थी उसे हाईकोर्ट ने बुद्धिराम केस में रद कर दिया था तथा 2017 का शासनादेश बुद्धि राम केस के निर्णय के अनुपालन में जारी किया गया है।
मामला यह है :- याची, धर्मराजी देवी गंगा प्रसाद सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जौनपुर में सहायक अध्यापक हैं। शुरू में यह उच्चतर प्राथमिक विद्यालय था। 1986 में इसे हाईस्कूल की मान्यता मिल गई। याची रिटायर हो चुके हैं और रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पांच फरवरी 2017 के शासनादेश के तहत पेंशन के लिए अपना प्रबंधकीय अंशदान ब्याज सहित जमा करना चाहा लेकिन उसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि शासनादेश का लाभ सिर्फ उच्चतर प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों के लिए है।
Published on:
14 Sept 2021 01:31 pm
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