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माथेरान अब फिर आबाद, वादियों में घंटा बजने पर चलने लगी टाय ट्रेन

मध्य रेलवे प्रशासन मानसून को देखते हुए 16 जून से अक्टूबर तक 4 महीनों के लिए ट्रॉय ट्रेन का संचालन बंद रखता है...

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पुणे

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Prateek Saini

Oct 20, 2018

matheran

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(मुंबई,पुणे): करीब चार महीने बाद माथेरान के लिए पर्यटकों का सिलसिला एक बार फिर शुक्रवार से शुरू कर दिया गया। वनीय शिखर के नाम से प्रसिद्ध माथेरान समुद्र तल से 2700 फिट ऊपर एक खूबसूरत रमणीय प्रदूषण रहित पर्वतीय पर्यटक स्थल के रूप में जाना जाता है। यह मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर नेरल स्टेशन से 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां वर्ष के बारह महीने पर्यटकों का आने-जाने का सिलसिला लगातार जारी रहता है, जिसमें शनिवार और रविवार को पर्यटकों कि संख्या अधिक नजर आती है। लोनावाला और मालशेज की अपेक्षा पर्यटक माथेरान को अधिक पसंद करते हैं।


माथेरान में कार्यरत टीटीआई आरआर चौधरी ने बताया कि नेरल से माथेरान की शटल करीब 4 माह बाद फिर शुरू हो गई है। मध्य रेलवे प्रशासन मानसून को देखते हुए 16 जून से अक्टूबर तक 4 महीनों के लिए ट्रॉय ट्रेन का संचालन बंद रखता है।

1850 में खोजी गई जगह 10 लाख में हुई थी विकसित...

इस रमणीय जगह की खोज 1850 में ठाणे के कलेक्टर हुंग पोंटज मालेट ने की थी। कहा जाता है कि मालेट कभी यहां घूमने आए थे और उन्हें यह जगह काफी पसंद आई। अब्दुल हुसेन आदमजी पीर भाई की देख रेख में 1904 में माथेरान का निर्माण शुरू हुआ और उस समय 10 लाख की लागत से निर्माण कार्य पूरा हुआ। 1907 में इसे पूरी तरह से शुरू कर दिया गया और तभी से पर्यटकों का आना-जाना अनवरत जारी है। आज इसकी शुरुआत हुए लगभग 111 साल हो गए हैं।


सड़क और रेल मार्ग दो साधन...

माथेरान तक जाने के लिए पर्यटकों के पास सिर्फ दो ही साधन हैं। नेरल जंक्शन से शटल, जिसे माथेरान लाईट रेलवे कहा जाता है। नेरल से माथेरान के लिए दिन भर में शटल ट्रेन को 7 बार चलाया जाता है। भाड़े की बात करें तो सेकंड क्लास का 50 रुपए, रिजर्वेशन 65 और फर्स्ट क्लास 265 निर्धारित है। सड़क मार्ग से टैक्सी द्वारा महज 80 रुपए में जाया जा सकता है। नेरल से माथेरान की दूरी 21 किलोमीटर की है।


प्रचलित है घंटा बजाने की प्रथा...

1907 में जब शटल ट्रेन की शुरुआत हुई थी, उसी समय माथेरान स्टेशन पर घंटा लगाया गया था। घंटे की आवाज दूर तक सुनाई देती है। ट्रॉय ट्रेन चलने के पहले घंटा बजाया जाता है, ताकि कोई यात्री छूट न जाय। एक बार ट्रेन चली गई तो वापस काफी देर बाद आती है। इसलिए 107 साल पहले जब इसकी शुरुआत हुई थी, तभी से घंटा लगा है और आज भी घंटा ही बजाया जाता है।

नायाब नक्काशी का चित्रण...

स्टेशन प्रबंधक गंगा सहाय मीणा के अनुसार, ट्रॉय ट्रैन लोगों के आकर्षण का केंद्र है और करीब 4 माह बंद के दौरान यह केवल माथेरान से अमन लॉज तक ही चलती है। बाद में बरसात बीत जाने के बाद इसे नेरल से माथेरान फिर से चलाया जाता है। वहीं सेंट्रल रेलवे के अधिकारी सुनील उदासी का कहना है कि यह ट्रेन मुसाफिरों के आकर्षण का केंद्र है, जिसे हम नफा-नुकसान के लिए नहीं, बल्कि लोगों के एंटरटेनमेंट के लिए ही चलाते हैं। वहीं इसे और ज्यादा आकर्षित करने के लिए हमने एक नया रैक तैयार किया है, जिसमें लोगों को आकर्षित करने के लिए नायाब नक्काशी को चित्रित किया गया है। भविष्य में हम जल्द ही जरूरत के अनुसार अन्य रैक के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।

पर्यटकों के निर्भर है व्यवसाय...


नेरल और माथेरान में सैकड़ो की तादाद में होटल गेस्ट हाउस और दुकानें हैं, जो पर्यटकों की संख्या पर ही निर्भर हैं। टैक्सी से लेकर घोड़े वालों तक का व्यवसाय बाहर से आने वाले पर्यटकों पर ही निर्भर है। आज उन्हीं के सहारे यहां लाखों लोगों की रोजी रोटी चल रही है। वहीं माथेरान में लोगों की सवारी के लिए यहां की घुड़सवारी भी आकर्षण का मुख्य केंद्र है।