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पुणे के युवक विवेक गुरव ‘प्वाइंट ऑफ लाइट’ पुरस्कार से सम्मानित, अपने इस काम से देश का नाम किया रोशन

यूके की सड़कों को साफ करने में मदद करने वाले पुणे के युवक विवेक गुरव को इंग्लैंड के प्रधानमंत्री द्वारा एक विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। साल 2021 में विवेक गुरव स्कॉलरशिप पर ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में आने के बाद से ब्रिटेन में प्लॉगिंग करते हैं। विवेक गुरव ने पुणे के कई इलाकों में कचरा देखकर 2019 में पुणे प्लॉगर की अवधारणा को लागू किया।

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Vivek Gurav

महाराष्ट्र के पुणे के एक युवक ने इंग्लैंड में देश का नाम ऊंचा किया है। यूके की सड़कों को साफ करने में मदद करने वाले विवेक गुरव को इंग्लैंड के प्रधानमंत्री द्वारा एक विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। विवेक गुरव ने पुणे के कई इलाकों में कचरा देखकर 2019 में पुणे प्लॉगर की अवधारणा को लागू किया था। इसके बाद विवेक ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन का अध्ययन करने के लिए लंदन में ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया।

बता दें कि विवेक गुरव के प्लॉगिंग अवधारणा को इंग्लैंड के प्रधानमंत्री द्वारा 'प्वाइंट ऑफ लाइट' पुरस्कार से सम्मानित करने का एलान किया गया है। 'प्वाइंट ऑफ लाइट' पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जो अपने समुदायों में बदलाव कर रहे हैं। यह पुरस्कार उत्कृष्ट व्यक्तिगत स्वयंसेवकों को दिया जाता है। प्लॉगर के इस आईडिया से विवेक गुरव ने भारत में काफी सम्मान अर्जित किया है। यूके में भारतीय राजदूत ने एक ट्वीट कर यह जानकारी दी है। यह भी पढ़ें: Maharashtra: क्या शिवसेना को बचाने के लिए आदित्य ठाकरे खुद उतरे मैदान में? ठाणे, नाशिक और औरंगाबाद जिलों का करेंगे दौरा

पुणे जयसिंहपुर के विवेक गुरव यूके में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के युवा छात्र और पर्यावरणवादी हैं। उन्होंने पुणे के एमआईटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। उसके बाद वे कुछ सालों तक आईटी में काम भी किए। इस दौरान पुणे शहर के अलग-अलग हिस्सों में घूमते हुए विवेक गुरव ने इलाके में कूड़ा-करकट चिन्हित करना शुरू कर दिया। साल 2019 में उन्होंने पुणे प्लॉगिंग नामक एक अवधारणा को लागू किया, यह महसूस करते हुए कि कचरा साफ करना न केवल नगरपालिका बल्कि आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है।

इस पहल में हर वीकेंड पर कई युवा सुबह मौज-मस्ती और टहलकर करके कचरा इकट्ठा करने लगे। उसके बाद इस पहल के लिए युवाओं की संख्या बढ़ती चली गई और शहर भी साफ होता गया। बता दें यह अवधारणा स्वीडन में व्यापक रूप से लागू की गई है। उन्होंने सोचा कि पुणे में इस अवधारणा को लागू करके पुरे पुणे का कचरा साफ किया जा सकता है और उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस पहल की शुरुआत की।

लोगों को इस बात का अंदाजा नहीं है कि पश्चिमी देशों में ऐसी अच्छी गतिविधियां होती हैं। आज के पीढ़ी के युवा कई सामाजिक समस्याओं का समाधान खोजने का काम कर रहे हैं, जिनमें से एक विवेक गुरुव है। भारत के कई शहरों में अब नागरिक प्लॉगिंग करके स्वच्छता बनाए रखते हैं। इन सभी गतिविधियों पर काम करते हुए विवेक गुरव को पर्यावरण के मुद्दों में रुचि बढ़ गई। उन्होंने देश के बाहर पर्यावरण शिक्षा की खोज शुरू की। इसके बाद उन्होंने लंदन के ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया।

विवेक गुरव को इस यूनिवर्सिटी में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रबंधन के पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए यूनिवर्सिटी से 26 लाख की छात्रवृत्ति मिली। उन्होंने अध्ययन करना शुरू किया कि कैसे विकसित देश अपने पर्यावरण संतुलन को बनाए रख रहे हैं और भारत कहां पिछड़ रहा है। देश से बाहर जाने वाला हर व्यक्ति देश को स्वच्छ और सुंदर पाता है। लेकिन ब्रिस्टल गांव में जाने के बाद मैंने महसूस किया कि पूरी दुनिया में भारतीयों की तरह ही आदतें मौजूद हैं। इसलिए उन्होंने ब्रिस्टल शहर में पुणे प्लॉगिंग शुरू करने का फैसला किया।

बता दें कि विवेक गुरव अपने विदेशी मित्रों को साथ लेकर छुट्टियों में शहर की सफाई करने लगे। उनकी गतिविधि को शहर के कई युवाओं ने पसंद किया और युवाओं के साथ-साथ शहर के लोगों ने भी इसमें जमकर भाग लिया। विवेक गुरव ने बताया कि कचरा, वह कचरा है जो पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ सकता है, और मेरे लिए भारत में कचरा उठाना और लंदन में कचरा उठाना एक ही है।

प्लॉगिंग क्या है: हम में से कई लोग सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए बाहर जाते हैं। मॉर्निंग वॉक के दौरान कचरा उठाकर शहर की सफाई करना प्लॉगिंग कहलाता है।

बता दें कि 'प्वाइंट ऑफ लाइट' की शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यालय से हुई थे। अब तक 6,000 अमेरिकियों को 'प्वाइंट ऑफ लाइट' पुरस्कार दिया जा चुका है। इस योजना को सभी अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने मंजूरी दे दी है। अब तक लगभग 1969 लोगों को सम्मानित किया जा चुका है।