
Maharashtra: महाराष्ट्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक बैंक अधिकारी, जो हिंदी में बात कर रहा है, उस पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के कार्यकर्ता मराठी में बात करने का दबाव बनाते और जबरदस्ती करते दिखाई दे रहे हैं। मराठी भाषा को लेकर विवाद पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में रहा है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद एक बार फिर भाषाई अधिकारों और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर बहस छिड़ गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एमएनएस के कुछ सदस्य महाराष्ट्र के माहिम इलाके की एक बैंक शाखा में घुसकर बैंक मैनेजर से मराठी में बात करने की मांग करते हैं। इस दौरान बैंक मैनेजर मराठी में बात करने से इनकार करते हुए कहता है कि वह हिंदी में ही बात करेगा। वह यह भी कहता है कि हिंदी उसकी मातृभाषा है और कहीं यह नहीं लिखा है कि मराठी में ही बात करना अनिवार्य है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो जाती है।
बताया जा रहा है कि एक मराठी युवक पिछले एक महीने से बैंक के चक्कर लगा रहा था, लेकिन बैंक का एक गैर-मराठी अधिकारी न तो उसे लोन से जुड़ी सही जानकारी दे रहा था और न ही ठीक से व्यवहार कर रहा था। इस बात की शिकायत महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता अनीश खंडागले से की गई, जिसके बाद कुछ कार्यकर्ता बैंक पहुंचे और हंगामा करने लगे।
महाराष्ट्र में भाषा को लेकर हिंदी भाषी और मराठी भाषी लोगों के बीच विवाद कोई नया नहीं है। बीते कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों के साथ मारपीट या सरेआम अभद्रता की गई। हाल ही में महाराष्ट्र के कल्याण इलाके में भाषा विवाद के चलते 19 वर्षीय एक युवक ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले एमएनएस कार्यकर्ताओं ने मुंबई महानगर क्षेत्र में एक मिठाई की दुकान के मालिक की मराठी न बोलने पर पिटाई भी की थी।
एमएनएस का कहना है कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्थानों और सरकारी कामकाज में मराठी भाषा का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे पहले भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई बैंक शाखाओं और दुकानों में अधिकारियों व कर्मचारियों से मराठी में बात करने की मांग की है। ऐसे कई वीडियो पहले भी वायरल हो चुके हैं। उदाहरण के तौर पर 29 जून 2025 की रात मीरा रोड इलाके में मराठी न बोलने पर एक दुकान मालिक को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आया था। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने कई एमएनएस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है।
वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इस तरह के हिंसक और दबाव बनाने वाले व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सांस्कृतिक पहचान का सम्मान जरूरी है, लेकिन कानून का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। किसी को डराने, धमकाने या जबरदस्ती करने का अधिकार किसी को नहीं है।
ये घटनाएं महाराष्ट्र में भाषाई अधिकार बनाम जबरदस्ती की बहस को एक बार फिर सामने ला रही हैं। जनता और अधिकारी दोनों ही इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किया जाए, लेकिन कानून और सार्वजनिक शिष्टाचार का उल्लंघन न हो।
Updated on:
05 Feb 2026 07:46 pm
Published on:
05 Feb 2026 07:42 pm
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