
रायबरेली. योगी सरकार के राज्य में वीवीआईपी रायबरेली में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिये केन्द्र से लेकर राज्य सरकार तक कसरत करती नजर आ रही है। व्यवस्था से सुचारु रूप से सचांलित करने के लिये करोड़ों का बजट आवंटित किया जाता है, लेकिन चिकित्सकों की शिकायत लगातार आती रहती है। सरकार की योजनाओं को भी ये चिकित्सक अनदेखी करते नजर आ रहे हैं। रायबरेली में आम जनता का पेड़ के नीचे इलाज किया जा रहा है।
रायबरेली डमलउ सीएचसी में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावों की धरातल पर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत ये है कि गरीबों को बेड के बजाय बरगद के नीचे बने चबूतरे पर उपचार कराने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। 30 बेड के अस्पताल को भी बाहर इलाज कराना पड़ रहा है।
चबूतरे पर ही इलाज करने लगे डॉक्टर
डलमऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तेज दर्द से कराह रहे बुजुर्ग को लाया गया। अस्पताल में दो वार्ड और तीस बेड है। लेकिन मरीज को प्राथमिक उपचार के लिये वार्ड में भर्ती तक नहीं किया गया। बताया गया कि एक वार्ड में मरम्मत का काम चल रहा था, जबकि दूसरे वार्ड में पोलियो अभियान से संबंधित मीटिंग चल रही थी। बुजुर्ग को दर्द ज्यादा था, इसलिये उसे परिजनों ने चबूतरे पर ही लिटा दिया। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक को उनकी बीमारी के बारे में बताया गया। चिकित्सक आए और चबूतरे पर ही उसका इलाज शुरू कर दिया। इस पर वहां मौजूद तीमारदारों ने आपत्ति की, जिस पर कुछ देर बाद बुजुर्ग को वार्ड में भर्ती कर लिया गया।
सीएचसी प्रभारी बोले
मामले पर डलमऊ सीएचसी प्रभारी, विनोद कुमार सिंह चौहान ने कहा कि अस्पताल के एक वार्ड में मरम्मत व दूसरे में मीटिंग चल रही थी। पेड़ के नीचे बुजुर्ग के उपचार का मामला संज्ञान में नही है। लेकिन जांच कराई जायेगी।
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Updated on:
16 Mar 2018 02:06 pm
Published on:
16 Mar 2018 10:05 am
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