
कांग्रेस से गठबंधन की बनती है स्थिति तो लैलूंगा सीट पर ही रहेगी गोंगपा की नजर
रायगढ़. यदि कांग्रेस के साथ गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का गठबंधन होता है तो वो लैलूंगा सीट की मांग करेगी, बाकि की चार सीट कांगे्रेस के लिए छोड़ देगी। यदि गठबंधन नहीं होता है तो रायगढ़ और धरमजयगढ़ की सीट पर गोंगपा अपने प्रत्याशी उतारेगी। ये बातें गोंगपा के जिला अध्यक्ष अमृत लाल पोर्ते ने कही। पोर्ते ने कहा कि हाल में ही बिलासपुर में पार्टी की बैठक में दादा यानि हीरा सिंह मरकाम ने कहा था कि गठबंधन की पहली शर्त यह है कि यहां का सीएम आदिवासी होना चाहिए।
ये बात हुई पार्टी के पदाधिकारियों के दावे की पर अब यदि जमीनी हकीकत को देखें तो साल २००३ के चुनावों से पार्टी जिले में बहुत अच्छी स्थिति में बिल्कुल ही नहीं है। साल २००३ के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने लैलूंगा से गोविंद सिंह नेटी को मैदान में उतारा था जहां नेटी को ३.२६ प्रतिशत यानि ३०६९ वोट मिले। इसके बाद खरसिया सीट से भैयालाल को मैदान में उतारा था यहां पार्टी को ०.४७ प्रतिशत यानि ५४५ वोट मिले।
2008 की स्थिति
साल २०१३ का चुनाव भी पार्टी के लिए कुछ विशेष नहीं रहा। इस चुनाव में पार्टी ने दो सीट लैलूंगा और सारंगढ़ से उम्मीदवार मैदान में उतारे। लैलूंगा से एक बार फिर गोविंद सिंह नेटी मैदान में थी और उन्हें ३.५ प्रतिशत यानि ३९९७ वोट मिले जबकि सारंगढ़ सीट से बाबूराम चौहान को मैदान में उतारा, चौहानको ०.४० प्रतिशत यानि ६४० वोट मिले।
2013 की स्थिति
साल २०१३ के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने थोड़ी हिम्मत दिखाई और तीन सीट से उम्मीदवार खड़े किए। इसमें लैलूंगा से कृपा राम सिदार जिसे ३.५७ प्रतिशत यानि ५४७२ वोट मिले। जबकि खरसिया से अजय कुमार सिदार को चुनावी मैदान में उतारा गया था। इसे ०.२८ प्रतिशत यानि ४५४ वोट मिले। वहीं धरमजयगढ़ से त्रिभुवन सिंह राठिया को पार्टी ने मैदान में उतारा जिसे १.४७ प्रतिशत यानि २३२६ वोट मिले।
-हम रायगढ़ और धरमजयगढ़ में अपना उम्मीदवार उतारेंगे, यदि गठबंधन होता है तो केवल लैलूंगा सीट की मांग की जाएगी। दादा ने कहा है कि गठबंधन की पहली शर्त प्रदेश में आदिवासी सीएम है- अमृत लाल पोर्ते, जिलाध्यक्ष गोंगपा
Published on:
05 Oct 2018 01:53 pm
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