
पार्टी की गतिविधियों की विधानसभावार होगी समीक्षा, तैयारी में जुटे जिले के कांग्रेसी
रायगढ़.26 जुलाई को जिले में कांग्रेस की गतिविधियों की विधानसभावार समीक्षा की जानी है। इसके लिए कांग्रेस के आला पदाधिकारी जिसमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं छग प्रभारी डॉ. अरुण ऊरांव, अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत भगत, अनुसूचित जाति के प्रदेश अध्यक्ष धनेश पाटिला, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र चंद्राकर शामिल रहेंगे। कहा यह जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी सहित तीनों प्रदेश के प्रकोष्ठ अध्यक्ष विधानसभा वार संगठन के पदाधिकारियों के काम काज की समीक्षा करगें। कांग्रेसी इसकी जोरदार तैयारी में जुटे हुए हैं।
इस समीक्षा बैठक से पहले ही शहर में खुद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच इस बात की चर्चा आरंभ हो गई है कि यदि गतिविधि की बात की जाए तो पार्टी की ओर से प्रदेश या राष्ट्रीय निर्देश के अलावा शायद ही कोई गिनी-चुनी गतिविधि पिछले कई वर्षों में आयोजित की गई है या आगे बढ़कर मुद्दा बनाया गया हो। तमनार, खरसिया, धरमजयगढ़ विधानसभा में आदिवासियों के जमीन हड़पे जाने के मामले में पार्टी की जिला या ग्रामीण बॉडी ने कोई विशेष रुचि कभी नहीं दिखाई है।
इस बात का असंतोष पीडि़तों और प्रभावितों में भी देखा गया है। खासकर खरसिया का कुनकुनी जमीन घोटाला जिसमें राष्ट्रीय अनुसूचित जन-जाति आयोग ने संज्ञान लिया वो कभी जिला लेबल पर पार्टी के लिए कोई मजबूत मुद्दा नहीं बन सका। पार्टी इसमें मुखर नहीं हो सकी। इसके अलावा तमनार की बात करें तो यहां भी जमीन हड़पे जाने के कई मामले सामने आए पर एक आध बार प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल का दौरा तो हुआ पर जिला बॉडी की ओर से कभी कोई फॉलोअप नहीं लिया गया।
एनटीपीसी में भी ऐसे हालात
वहीं यदि रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो पुसौर एनटीपीसी मामले में भी जिला कांग्रेस खामोश ही दिखती है। सच्चाई यह भी है कि यहां कुछ कांग्रेसी नेताओं की ठेकेदारी भी चल रही है। इसके कारण भी ये मुद्दा प्रमुखता से कांग्रेस की लिस्ट में शामिल नहीं हो सका।
शौचालय घोटाला केवल खानापूर्ति
निगम में करोड़ों का शौचालय घोटाला भी कांग्रेस के लिए प्रमुख मुद्दा नहीं बना, गाहे-ब-गाहे विज्ञप्ति और ज्ञापन का दौर तो चला पर वो सक्रियता नहीं दिखाई जिससे पीडि़तों को यह महसूस हो सके कि विपक्ष के तौर पर कांग्रेस उनके साथ है। इस घोटाले में भी यह बात सामने आई कि शौचालय निर्माण के ठेके में कांग्रेसी भी शामिल थे। ऐसे में आंच तो इन पर भी आ रही थी।
बड़माल प्रकरण में भी दो फाड़
बड़माल में रेत तस्करी और भाजपा मंडल महामंत्री पर लगे आरोपों की जांच के लिए कांग्रेस ने टीम तो बना दी पर इसमें भी कांग्रेसी दो फाड़ दिखे। एक पक्ष बकायदा इस बात को स्वीकार कर रहा था कि वहां पर आतंक व तस्करी का माहौल है। जबकि मौके पर ही दूसरा पक्ष भाजपा की भाषा बोल रहा था। ऐसे में वहां पर आधा दर्जन से ज्यादा बहिष्कृत परिवारों का आवेदन एसपी ऑफिस में आज भी लंबित है पर इस मामले में भाजपा कांग्रेस पर भारी पड़ गई और कांग्रेसी बैकफुट पर आ गए।
Published on:
25 Jul 2018 04:16 pm
बड़ी खबरें
View Allरायगढ़
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
