
कोर्ट ने भू-अर्जन संशोधन अधिनियम किया निरस्त, प्रभावितों को मिलेगा लाभ
रायगढ़. केंद्रीय भू-अर्जन अधिनियम २०१३ में संशोधन करते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रभावितों को मुआवजा राशि दो गुना से घटाकर एक गुना करने नोटिफिकेशन जारी करते हुए उसे लागू कर दिया। इसको लेकर हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस नोटिफिकेशन को निरस्त करने का आदेश दिया है। अगर राज्य सरकार इस नोटिफिकेशन को निरस्त करती है तो इसके आधार पर पूर्व में कई प्रोजेक्ट के प्रभावितों को एक गुना और मुआवजा राशि देना पड़ेगा।
केंद्रीय भू-अर्जन अधिनियत २०१३ में जहां शहरी क्षेत्र में गुणांक एक रखा गया था तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र में गुणांक दो रखा गया था साथ ही दोनो में १०० प्रतिशत सोलेशियम राशि का प्रावधान था जिसके कारण शहरी क्षेत्र में दो गुना तो ग्रामीण क्षेत्र के प्रभावितों को चार गुना मुआवजा राशि दिया गया। लेकिन एकाएक राज्य सरकार द्वारा २०१३ में किए गए संशोधन के बाद सभी को एक गुना करते हुए १०० प्रतिशत सोलेशियम राशि का प्रावधान कर दिया गया। जिसके कारण इस दौरान जिले में चालू हो रहे प्रोजेक्ट एनटीपीसी रेल लाईन, ईस्ट रेल कारीडोर, पॉवर प्लांट व निजी कोल माईंस में एक गुना मुआवजा राशि का प्रदाय किया गया। उक्त संशोधन राज्य सरकार ने रेखीय परियोजनाओं के लिए किया गया था जिसके कारण जिले में रेखीय परियोजनाओं में काफी प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। चार दिसंबर २०१४ को जारी नोटिफिकेशन को कोर्ट के आदेश पर निरस्त किया जाता है तो उक्त सभी प्रोजेक्ट के प्रभावितों को दोगुनी मुआवजा राशि देनी होगी। यही कारण है कि सरकार इस आदेश को लेकर रिव्यू लगाने पर विचार कर रही है।
प्रभावितों ने भी किया था विरोध
इस संशोधन आदेश के कारण एक गांव के किसान को जहां चार गुना मुआवजा राशि दिया जा रहा था तो वहीं पड़ोसी गांव के प्रभावितों को दो गुना मुआवजा राशि दिया जा रहा था। इसको लेकर प्रभावितों ने काफी विरोध किया था। कोतरलिया और रेगड़ा क्षेत्र में ग्रामीणों ने रेल लाईन के लिए जमीन देने से इंकार करते हुए काम रोक दिया था साथ ही मुआवजा राशि भी नहीं उठाए थे।
-कोर्ट से ऐसा आदेश हुआ है इसकी जानकारी नहीं है। शासन से जैसा आदेश आएगा उसी तरह से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भागवत जायसवाल, एसडीएम, रायगढ़
Updated on:
06 Nov 2018 08:45 pm
Published on:
06 Nov 2018 08:45 pm
