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#हालात ने कर दिया इतना मजबूर कि बेटी ने मां का शव लेने से किया इंकार, पढि़ए पूरी खबर

3 दिन पहले खरसिया रेलवे परिसर में हुई थी 85 वर्षीय महिला की मौत

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3 दिन पहले खरसिया रेलवे परिसर में हुई थी 85 वर्षीय महिला की मौत

3 दिन पहले खरसिया रेलवे परिसर में हुई थी 85 वर्षीय महिला की मौत

रायगढ़. रुपए के आगे रिश्तों की कीमत उस समय एक बार फिर देखने को मिली। जब एक बेटी ने अपने 85 साल के वृद्ध मां के शव को अपनाने से इंकार कर दिया। जो खरसिया रेलवे स्टेशन पर बैठ कर भीख मांगने का काम करती थी। जीआरपी ने शव को पहले अज्ञात में मर्ग कायम कर विवेचना की। पर शव की पहचान होने व अपनों द्वारा शव लेने से इंकार करने के बावजूद जीआरपी ने वृद्ध महिला को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया।

रायगढ़ जीआरपी में 3 दिन पहले एक अजीबो गरीब मामला सामने आया। जब एक वृद्ध महिला के शव की पहचान होने के बाद उसके अपनों से अपनाने से इंकार कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार मामला खरसिया रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है। जहां सोमवार की देर शाम एक 85 वर्षीय वृद्ध महिला की मौत हो गई।

मृतिका, खरसिया रेलवे स्टेशन पर भीख मांग कर जीवन यापन करती थी। पहले तो जीआरपी ने अज्ञात मेंं मर्ग कायम कर शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेजा। वारिशान की पतासाजी के दौरान वृद्ध महिला की पहचान खरसिया के घसियापारा निवासी नवापरवीन पति पोखल सारथी के रुप में हुई। पुलिस ने पतासाजी के दौरान उसकी शादीशुदा बेटी की खोज की। वहीं उसे उसकी वृद्ध मां की मौत की खबर देकर शव को लेने की बात कही।

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परर उक्त बेटी ने अपने मां के शव को अपनाने ये यह बात कहते हुए इंकार कर दिया कि मेरी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। जैसे-तैसे पेट भर रहा है। ऐसे में, मां के शव का अंमित संस्कार व अन्य धार्मिक कर्म-कांड कैसे कर पाउंगी। एक पल के लिए जीआरपी भी हैरान हो गई। पर उसकी स्थिति व शव का पीएम कराने में हो रही देरी के बीच जीआरपी को खुद ही मृत महिला का अंतिम संस्कार करना पड़ा।


विधवा बेटी ने गिनाई परेशानियां
जीआरपी के समक्ष शव लेने से इंकार करने वाली बेटी के पति की पहले ही मौत हो गई है। ऐसे में, उसने अपनी आर्थिक परेशानियों में पति का मौत का भी उल्लेख किया है। जिसके बाद जीआरपी ने मानवता का परिचय दिखाते हुए वृद्ध महिला की पहचान होने के बादवजूद खुद से अंतिम संंस्कार किया। जानकार यह भी कह रहे है कि अब तक ड्यूटी में यह शायद पहला मामला है। जब मृतिका की पहचान होने के बावजूद आर्थिक तंगी का हवाला देकर अपनों से शव लेने से इंकार कर दिया।