
रायगढ़. राइसमिलरों को झूठी क्षमता के आधार पर जारी किए गए प्रोत्साहन राशि के मामले में दोबारा फाइल खोल दी गई है। विदित हो कि इस मामले को पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद एडीएम रोक्तिमा यादव ने पूर्व में हुए जांच प्रकरण को मंगाकर खाद्य अधिकारी व डीएमओ को तलब किया है। तात्कालीन सहायक कलक्टर प्रभात मल्लिक के द्वारा की गई जांच को फिर से स्टडी किया जा रहा है ताकि इस मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की जा सके।
ज्ञात हो कि तात्कालीन सहायक कलक्टर प्रभात मल्लिक ने वर्ष 2016-17 में चले कस्टम मिलिंग के दौरान पंजीकृत राइसमिलरों के क्षमता का परीक्षण किया था। इस दौरान 57 राइसमिल ऐसे मिले थे जो कि वास्तविक क्षमता को छिपाकर कम क्षमता का पंजीयन कराए हुए थे। ताकि रिकार्ड में समय के पूर्व कस्टम मिलिंग दिखाकर प्रोत्साहन राशि का लाभ ले सकें।
इस मामले में खुलासा होने के बाद सभी राइसमिलरों से शपथ पत्र लेकर क्षमता बढ़ाने का निर्देश दिया गया था लेकिन उक्त अधिकारी के यहां से जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया और विपणन विभाग व खाद्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से उक्त 57 राइसमिलों का क्षमता नहीं बढ़ा और प्रोत्साहन राशि भी जारी कर दिया गया। इसके कारण शासन को करीब 3 करोड़ रुपए के चपत लगने का अनुमान जांच के दौरान लगाया गया था। इन राइसमिलरों को प्रोत्साहन राशि जारी करने का मामला सामने आने के बाद भी विपणन विभाग व प्रशासन चुप्पी साधते हुए प्रकरण ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब इस मामले की भनक लगने के बाद कलक्टर शम्मी आबिदी के निर्देश पर एडीएम रोक्तिमा यादव ने पुाइल मंगवाई है।
चपत लगने के बाद भी नहीं पड़ रहा कोई फर्क
विपणन विभाग के माध्यम से शासन को करीब 3 करोड़ रुपए की चपत लगने का अनुमान लगाया जा रहा है लेकिन इस मामले में विपणन विभाग के अधिकारी जानकर भी अनजान बैठे हुए हैं। विपणन विभाग में उच्च अधिकारियों के निर्देश का इंतजार कर रहा है।
Published on:
05 Jan 2018 01:27 pm
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