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लाखों की ठगी करने वाला दूसरा आरोपी भी पकड़ाया, नौकरी लगवाने के नाम पर ली थी रकम

- शासकीय नौकरी लगाने की बात कह दो लोगों ने की थी ढाई लाख की ठगी -बुधवार को दूसरे आरोपी को पकडऩे रायपुर गई थी कोसीर पुलिस

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रायगढ़. बेटे को शासकीय नौकरी लगाने की बात कह उसके पिता से लाखों रुपए की ठगी करने वाले एक आरोपी को पुलिस ने मंगलवार को ही गिरफ्तार कर लिया था। जबकि दूसरे आरोपी को बुधवार को पुलिस रायपुर स्थित उसके निवास से पकड़ कर लाई है। पुलिस ने दोनों आरोपी को रिमांड में जेल भेज दिया है। घटना कोसीर थाना क्षेत्र की है।

ज्ञात हो कि कोसीर के ग्राम मचगोढ़ा निवासी इंदल प्रसाद पिता राम धोबी (53) के रिश्ते का भतीजा विष्णु बरेठ जोकि ग्राम सुलोनी का रहने वाला है, ने इंदल के बेटे व रिश्ते में अपने भाई लगने वाले डिलेश्वर को छात्रावास अधीक्षक की नौकरी लगाने की बात कहते हुए इंदल से साल 2016 में चार किश्तों में 2.50 लाख रुपए लिया था। माह बीतते गए, लेकिन डिलेश्वर का कहीं नौकरी नहीं लगा।

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ऐसे में प्रार्थी इंदल ने विष्णु से अपने रुपए की मांग करने लगा। रुपए मांग पर विष्णु इंदल को टाल-मटोल करने लगा। ऐसे में इंदल ने गांव में बैठक बुलाकर आरोपी विष्णु को भी वहां बुलवाया। जहां विष्णु ने ढाई लाख को रायपुर के अशोक ठाकुर को नौकरी लगाने के लिए देना बताया। जिसे वह तीन किश्तों में लौटाने का आश्वासन दिया। इसके बाद भी वह रुपए नहीं लौटा रहा था। ऐसे में प्रार्थी ने इसकी शिकायत कोसीर थाने में की थी। जहां पुलिस दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 34 के तहत अपराध दर्ज कर मामले की विवेचना की रही थी।

इस मामले में पुलिस ने विष्णु बरेठ को मंगलवार को ही ग्राम सुलोनी से गिरफ्तार कर लिया था। वहीं बुधवार को कोसीर पुलिस की एक टीम रायपुर के आजाद चौक थाना पहुंची। जहां थाने से महिला व पुरूष पुलिस का अतिरिक्त बल लेकर उसी थाना क्षेत्र के स्वामी विवेकानंद आश्रम के पीछे, ईदगाह भाठा, गली नंबर 06 वार्ड 60 में रहने वाले आरोपी अशोक ठाकुर के घर में छापामार कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को रिमांड में जेल भेज दिया है।
एक-दूसरे पर मढ़ रहे आरोप
पकड़े गए आरोपियों से जब पुलिस ने रकम के संबंध में पूछताछ की तो वे दोनों एक-दूसरे पर ही आरोप मढ़ रहे थे। विष्णु बरेठ का कहना था कि मैनें पूरा पैसा अशोक ठाकुर को दिया है। जबकि आशोक ठाकुर का कहना था कि मुझे सिर्फ एक लाख मिला है बाकी डेढ़ लाख को विष्णु बरेठ स्वयं खा गया है।

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