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अब रायगढ़ वाले बिना जन्म प्रमाण पत्र के नहीं कर पाएंगे शादी, जानिए क्या है पूरा मामला

Marriage in Chhattisgarh: अब शादी करने से पहले ना सिर्फ जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा बल्कि उसे अपने निमंत्रण पत्र पर अभी छपवाना पड़ेगा

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अब रायगढ़ वाले बिना जन्म प्रमाण पत्र के नहीं कर पाएंगे शादी, जानिए क्या है पूरा मामला

रायगढ़. Marriage in Chhattisgarh: बाल विवाह रोकने प्रशासन अब नई पहले शुरू की है। इसमकें कलेक्टर ने जिले के समस्त मंदिरों (ट्रस्ट) और प्रिंटिंग प्रेस को एक पत्र जारी करते हुए बाल विवाह रोकने में सहयोग प्रदान करने की बात कही है।

वहीं प्रिंटिंग प्रेस में शादी कार्ड में जांच-पड़ताल के बाद वर-वधु की ओरिजनल डेट ऑफ बर्थ प्रकाशित की जाएगी। वहीं मंदिरों में विवाह होने से पहले वर-वधु की कुंडली खंगाली जाएगी। कलेक्टर का यह पैगाम मंदिरों और प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने भी शुरू हो गए हैं।

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जिले में बाल विवाह का प्रचलन आज भी विद्यमान है। इसकी सूचना बीच-बीच में जिला प्रशासन को मिलती रहती है। वहीं महिला बाल विकास विभाग और जिला बालसंरक्षण इकाई के पास लगातार आ रहे बाल विवाह के प्रकरणों को देखते हुए कलेक्टर यशवंत कुमार ने उनसे सूची मांगी और मामले को गंभीरता से लेते हुए मंदिरों और प्रिंटिंग प्रेस को एक लेटर जारी किया।

मंदिरों के लिए कलेक्टर अपने पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि कई विवाह मंदिरों में सम्पन्न कराए जाते हैं, जिनमें वर-वधु के संबंध में जानकारियों का संधारण एवं परीक्षण नियमानुसार नहीं किया जाता है। इससे कई बार बाल विवाह भी संपन्न हो जाता है।

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ऐसे में कलेक्टर ने मंदिर प्रबंधनों को अपने पत्र में साफ तौर पर कहा कि विवाह से पहले वर-वधु का मूल जन्म तिथी संबंधी दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल मार्कशीट, स्कूल का दाखिल खारिज, आंगनबाड़ी में दर्ज जानकारी एवं कोटवार पंजी में दर्ज अभिलेख इत्यादि की मांग करें एवं समुचित जांच परीक्षण के बाद ही विवाह कराएं।

साथ ही अपने यहां होने वाले विवाह की जानकारी प्रतिमाह जिला प्रशासन व महिला बाल विकास विभाग को नाम पता के साथ उपलब्ध कराएं। इसके बाद भी अगर मंदिरों में बाल विवाह कराया जाता है तो सभी खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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प्रिंटिंग प्रेस के संबंध में कलेक्टर यशवंत ने अपने चिट्टी में कहा है कि प्राय: सभी लोग विवाह के लिए शादी कार्ड, निमंत्रण पत्र प्रिंटिंग प्रेस से ही छपवाकर वितरित करते हैं। ऐसे में प्रिंटिंग प्रेस का संचालक कार्ड छपावाने का आर्डर लेते समय वर-वधु का मूल जन्म तिथी संबंधी दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल मार्कशीट, स्कूल का दाखिल खारिज, आंगनबाड़ी में दर्ज जानकारी एवं कोटवार पंजी में दर्ज अभिलेख इत्यादि की मांग करें एवं प्रत्येक शादी कार्ड में जन्म तिथि प्रकाशित करें।

जिले की पहली पहल

मिली जानकारी के अनुसार यह पहला मामला है जहां जिला कलेक्टर द्वारा बाल विवाह रोकने के लिए अच्छी पहल की जा रही है। इससे बाल विवाह के रोकथाम में जिला प्रशासन व संबंधित विभाग को काफी हद तक मदद मिलेगी। वहीं हर जगर वर-वधु के जन्म संबंधी दस्तावेजों की जांच होने शुरू होने से बाल विवाह पर प्रतिबंध भी लगेगा।

कई मंदिरों में रुकवा चुके हैं शादी

इस संबंध में जिला बाल संरक्षण अधिकारी दीपक डनसेना ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व में जिले व जिले से लगे कई मंदिरों जैसे चन्द्रपुर स्थित चन्द्रहासिनी मंदिर, जामगांव मानकेसरी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में बाल विवाह की जानकारी मिलने पर कई शादी रूकवा चुके हैं। इसीलिए कलेक्टर द्वारा मंदिर प्रबंधनों को पत्र जारी कर जन्म संबंधी दस्तावेजों की जानकारी लेने के लिए कहा गया है। ताकि बाल विवाह की प्रथा बंद हो सके।

मंदिरों में इसलिए कहा गया है कि वहां बिना उम्र की जांच पड़ताल किए विवाह हो जाता है। प्रिटिंग प्रेस में भी शादी कार्ड में जन्म तिथि दर्ज किए जाने के लिए पत्र भेजा जा रहा है। इससे जागरूकता आएगी और बाल विवाह रोकने मेें मदद मिलेगी।
-टिकवेंद्र जाटवर, डीपीओ, महिला बाल विकास विभाग

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