
आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, पढि़ए किसको-किसको भरना है अनिवार्य
रायगढ़. अगर आपने अपना आयकर रिटर्न तय समय पर दाखिल नहीं किया तो इस बार लेट फीस देनी पड़ेगी। इनकम टैक्स से जुड़े नियमों को सरकार ने कड़ा कर दिया है। सरकार ने बजट में जहां करदाताओं को कई सहूलियतें दी हैं वहीं आयकर रिटर्न जमा न करने वालों के लिए नियम सख्त कर दिए हैं।
रायगढ़ एवं जशपुर के आयकर अधिकारी जीतेन्द्र सिंह ने बताया कि रिटर्न अगर अंतिम तारीख के बाद भरा जाता है तो धारा 234 एफ के तहत 5000 रुपए लेट फीस देनी होगी 31 दिसंबर के बाद रिटर्न फाइल करने वालों को 10000 रुपए लेट फीस देनी होगी। पांच लाख से कम आय वालों को थोड़ी राहत दी गई है उन्हें लेट फीस अधिकतम 1000 रुपए देने होंगे। 31 मार्च 2019 के बाद वित्तीय वर्ष 2017-18 यानि कर निर्धारण वर्ष 2018-19 का रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि लेट फीस के बाद भी आयकर अधिकारी को धारा 271 एफ के तहत 5000 जुर्माना लगाने का अधिकार है वहीं ऐसे करदाता पर मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
आयकर अधिकारी जीतेन्द्र सिंह ने आयकर दाताओं से समय पर रिटर्न दाखिल करने का आव्हान करते हुए आगे बताया कि सामान्य करदाताओं को किसी वित्तीय वर्ष का रिटर्न उसके तुरंत बाद वाले वर्ष की 31 जुलाई तक भरना होता है। ध्यान रहे, अगर आपने टैक्स देनदारी बनने के बावजूद जानबूझकर टैक्स जमा नहीं किया है और रिटर्न भी दाखिल नहीं किया है तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इनके लिए है अनिवार्य
उन्होंने कहा कि 60 वर्ष से कम के सभी ऐसे भारतीय नागरिकों को आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है, जिनकी आमदनी सकल आय सालाना 2.5 लाख रुपए या इससे अधिक है। सीनियर सिटिजन जिनकी उम्र 60 से 80 वर्ष के बीच में है, उनकी सालाना आमदनी अगर तीन लाख रुपए से अधिक है तो उन्हें भी आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है।
सुपर सीनियर सिटिजन जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है, अगर उनकी आमदनी सालाना 5 लाख रुपए से ऊपर है तो उन्हें भी आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है। अगर आपकी कोई कंपनी या फर्म है तो उसके नाम पर भी हर साल आयकर रिटर्न दाखिल होना अनिवार्य है। भले ही सालाना आमदनी कितनी भी कम हो या अधिक हो। यहां तक कि नुकसान हुआ हो तो भी उसके लिए आयकर रिटर्न भरा जाना अनिवार्य है। अगर आपका टीडीएस ज्यादा कट गया है या फिर आपने स्वयं एडवांस टैक्स के माध्यम से ज्यादा टैक्स जमा कर दिया है तो उसका रिफंड पाने के लिए भी उस साल का आयकर रिटर्न भरा जाना अनिवार्य है।
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यदि हुआ है नुकसान तो भी भरना होगा
अगर आपको पिछले वित्त वर्षों के दौरान आमदनी में कोई नुकसान झेलना पड़ा है तो उसे आगे के वर्षों में समायोजन के लिए ले जाने के लिये भी आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है।अगर आपको किसी कंपनी का शेयर बेचने में हुआ दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ 2.5 लाख रुपए से ज्यादा हुआ है तो टैक्स छूट पाने के बावजूद इसकी सूचना आयकर रिटर्न में दी जानी अनिवार्य है।उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2017-18 तक शेयरों के लांग टर्म कैपिटल गेन्स को टैक्स छूट मिली हुई थी। लेकिन ऐसा मुनाफा पाने वाले के लिए रिटर्न भरना अनिवार्य है। इसी प्रकार अगर आपने इक्विटी वाली म्यूच्यूअल फंड यूनिट्स बेचकर या किसी बिजनेस ट्रस्ट की यूनिट बेचकर साल के दौरान 2.5 लाख रुपए से अधिक का लांग टर्म कैपिटल गेन्स कमाया है तो उसके लिए भी आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है ।
टैक्स में छूट है इसके बाद भी
टैक्स छूट के बावजूद अगर आप भारतीय नागरिक हैं और आपको विदेश स्थित किसी संपत्ति या संस्था से वित्तीय लाभ प्राप्त हो रहा है तो भी आपको इनकम टैक्स रिटर्न भरना अनिवार्य है। अगर आप भारतीय नागरिक हैं, लेकिन विदेश स्थित कोई अकाउंट अगर आपके हस्ताक्षर से संचालित होता है तो भी आपको आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है। अगर आपने किसी सामाजिक ट्रस्ट की संपत्ति बेचने से किसी प्रकार की आमदनी प्राप्त की है तो भी आपको आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। इनमें जनहितकारी, धाार्मिक, राजनैतिक, शैक्षिक, चिकित्सा या अन्य ऐसे कार्यों में लगे ट्रस्टों की संपत्ति शामिल है। कुछ विशेष देशों में जाने के लिए वीजा पाने के लिए भी आयकर रिटर्न की रसीद पेश करनी अनिवार्य होती है। हालांकि कुछ देशों में जाने के लिए इसकी जरूरत नहीं भी होती है ।
इसलिए जरूरी है आयकर रिटर्न
बैंकों या वित्तीय संस्थानों से लोन (घर, वाहन, बिजनेस वगैरह के लिए) या क्रेडिट कार्ड जारी कराने के लिए भी अक्सर आयकर रिटर्न की जरूरत पडती है। इस तरह आयकर रिटर्न न केवल आपका दायित्व है बल्कि इसको भरने से कई लाभ भी आयकर दाता को प्राप्त होते हैं।
Published on:
06 Jul 2018 07:33 pm
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