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ऐसा क्या हुआ कि दशकों पुरानी कैदियों की सजा माफी व रिहाई की सौगात पर लगा ग्रहण, पढि़ए पूरी खबर…

- गुरु घासीदास जयंती पर कैदियों को मिलता था यह लाभ, पिछले दो साल से है प्रतिबंध, - जेल के अधिकारी कर रहे हैं पुष्टि, मुख्यालय से नहीं आया है कोई पत्र

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ऐसा क्या हुआ कि दशकों पुरानी कैदियों की सजा माफी व रिहाई की सौगात पर लगा ग्रहण, पढि़ए पूरी खबर...

रायगढ़। गुरुघासी दास जयंती पर प्रदेश के सभी जेल से कैदियों को मिलने वाली सजा माफी व रिहाई पर स्थायी रुप से बे्रक लगने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले दो साल से सजा माफी पर लगा ग्रहण इस बार भी कायम है, जिसकी पुष्टि जेल के आला अधिकारी भी कर रहे हैंं। उनकी मानें तो इस संबंध में अब तक जेल मुख्यालय से कोई पत्र नहीं आया है। जबकि कैदियों के सजा माफी व रिहाई संबंधी कवायद की पहल, उक्त जयंती के करीब दो सप्ताह पहले से शुरू हो जाती है। जो अब तक नहीं हुई है।

प्रदेश के जेल में सजा काट रहे कैदियों को एक साल में तीन बार सजा माफी व रिहाई की सौगात मिलती है। जिसमें २६ जनवरी (गणतंत्र दिवस), १५ अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) व १८ दिसंबर गुरु घासादास जयंती शामिल है, पर पिछले दो साल से कैदियों को मिलने वाले इस विशेष लाभ पर ग्रहण लगा गया है। जिसका असर इस बार भी गुरु घासीदास जयंती पर देखा जा रहा है।

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जेल मुख्यालय से कैदियों की रिहाई व सजा माफी को लेकर 17 दिसंबर की दोपहर तक कोई पत्र रायगढ़ जिला जेल के अधिकारियों तक नहीं पहुंचा है। जिसकी पुष्टि खुद जेल के आला अधिकारी कर रहे हैं। जबकि इससे पहले कैदियों को इसका लाभ देने के लिए करीब दो सप्ताह पहले ही उनके आचरण, सजा की अवधि व अन्य मापदंडों को खंगालने की कवायद शुरु हो जाता है। पर पिछले दो साल से ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।
इस संबध में आला अधिकारी भी खुलकर बोलने से परहेज कर रहे हैं। वहीं जेल मुख्यालय का मामला बता कर पल्ला भी झाड़ रहे हैं।

सूत्र इसके पीछे कोर्ट में दायर एक याचिका का हवाला दे रहे हैं, जो हत्या के एक दोषी से जुड़ा हुआ है। जब सभी कैदियों को सजा माफी व रिहाई की सौगात मिल सकती है तो उक्त हत्यारे को क्यों नहीं, जो पिछले कई वर्षो से जेल की चारदीवारी के बीच अपनी सजा काट रहा हैं। इस पेचिदा मामले को लेकर कैदियों के सजा माफी व रिहाई का मुद्दा लटक गया है, जिस पर अधिकारी भी खुलकर बोलने से हिचकिचा रहे हैं।

कैदियों को रहता है इंतजार
जानकारों की मानें तो साल में शासन द्वारा मिलने वाले इस विशेष लाभ का कैदियों का काफी इंतजार रहता है। जिससे उनकी सजा में एक सप्ताह से लेकर करीब तीन माह तक की छूट दी जाती है। हालांकि इसमें उनके जेल अंदर रहने के दौरान आचरण का विशेष योगदान रहता है, पर दशकों पुरानी परंपरा पर हाल के कुछ वर्षों से लगे ब्रेक पर कैदी भी मायुस हैं। ऐसे में, अब उन्हें कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के तय अवधि पूरा होने के बाद ही जेल की चारदीवारी से मुक्ति मिलेगी।