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रायगढ़ में घूमने के लिए बेहतरीन हैं ये जगहें, वॉटरफॉल और झील ही नहीं, राजा के किलों का भी मिलेगा अनुभव

Raigarh Tourist Places: रायगढ़ उन शहरों में से एक है, जिसके जल्द ही विकसित होने की सबसे अधिक संभावना है। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह स्थान सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की कगार पर है। इस क्षेत्र में कथक नृत्य और अन्य शास्त्रीय कलाएँ अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।

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Raigarh Tourist Places

Raigarh Tourist Places: रायगढ़ नृत्य और संगीत की कला को संरक्षित करने के लिए समर्पित विभिन्न आयोजनों का घर है। चक्रधर समारोह इनमें से एक ऐसा आयोजन है जो सबसे प्रसिद्ध है। इन आयोजनों ने शहर को राज्य के शीर्ष पर्यटन स्थलों में से एक के रूप में वर्तमान दर्जा दिलाया है। झीलों, संग्रहालयों और मंदिरों सहित घूमने के लिए कई स्थान हैं। यह उचित अन्वेषण दृष्टिकोण विकसित करने के लिए एक उत्कृष्ट स्थान है।

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Raigarh Tourist Places: इतिहास: महाराज मदन सिंह को रायगढ़ का संस्थापक माना जाता है, जो महाराष्ट्र से आए थे। बताया जाता है कि पहले रायगढ़ संबलपुर जिले का एक भाग था और मदन सिंह उसके सांमत थे। कालांतर में उन्होंंने यहां अपना स्वतंतर राज्य स्थापित किया। महाराजा मदन सिंह ने महानदी के किनारे एक किला यानि गढ़ बनवाया जिसका नाम 'राय' था। इसी गढ़ के नाम पर इसे 'रायगढ़' नाम मिला। महराजा चक्रधर सिंह स्वतंत्र रायगढ़ के अंतिम राजा थे। स्वतंत भारत में सम्मिलित होने वाली पहली कुछ रियासतों में रायगढ़ भी शामिल था। पहले यह मध्य प्रदेश का हिस्सा बना और बाद में छत्तीसगढ़ के गठन के बार इसमें शामिल हो गया।

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प्रमुख पर्यटन स्थल: सिंघनपुर: यह गुफा रायगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह छत्तीसगढ़ में प्राप्त प्राचीनतम शैलचित्र युक्त शैलाश्रयों में से एक है। यहाँ अंकित चित्रों में सीढ़ीनुमा पुरुष, मत्स्यांगना, शिकार दृश्य, पंक्तिबद्ध नर्तक टोली एवं अन्य मानवाकृतियाँ सम्मिलित हैं। इन चित्रों की तिथि लगभग ईसापूर्व 30 हज़ार वर्ष निर्धारित की गई है। इनकी खोज एंडरसन द्वारा 1910 के आसपास की गई थी।

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इंदिरा विहार: यह रायगढ़ से लगभग दो किलोमीटर दूर है, और अगस्त 1988 में इसकी स्थापना वन अधिकारी जे.के. उपाध्याय ने की थी। यह क्षेत्र के कुछ सबसे बड़े जानवरों का घर है, जैसे चीतल, जंगली सुअर, भालू और खरगोश, आदि। यह अपने पिकनिक के लिए भी जाना जाता है, जहाँ बहुत सारे पिकनिक क्षेत्र और झूले हैं। यह छत्तीसगढ़ में पहला बंदर सुविधा केंद्र भी है, और वे बंदरों की आबादी को स्वस्थ रखने के लिए लगातार बढ़ती संख्या में बंदरों को रख रहे हैं।

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राम झरना: शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर खरसिया ब्लॉक में राम झरना एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। घने जंगल के भीतर एक प्राकृतिक जलस्रोत है, जो लगातार बह रहा है और लगभग डेढ़ किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। मान्यता हैं कि वनवास काल के दौरान दूर-दूर तक भटकने के बावजूद भी श्री राम को जब पानी नहीं मिला तब उन्होंने बाण से धरती में छेद कर दिया और प्यास से व्याकुल सीता माता के लिए पानी उपलब्ध कराया। वह जलस्रोत ही राम झरना कहलाता है।

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राबो डैम: राबो डैम रायगढ़ शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है। यह 367 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें एक नीला केबिन है जहाँ मछलियाँ रखी जाती हैं। कुर्क नदी बांध जिंदल थर्मल पावर प्लांट को पानी की आपूर्ति करने के लिए बनाया गया था, और पास में एक मंदिर बनाया गया था।

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गौरीशंकर मंदिर: यह रायगढ़ का ख्यातिलब्ध मंदिर है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें भगवान शिव और पार्वती की पूजा होती है, लेकिन झूला उत्सव भगवान श्रीकृष्ण का होता है। सन 1946 में इस मंदिर को बनवाने के लिए दानवीर सेठ किरोड़ीमल ने हरियाणा से कारीगर बुलवाया था। सन 1948 में गौरीशंकर मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई।

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राधा कृष्ण मंदिर: शहर के कई पवित्र स्थलों में से एक राधा कृष्ण मंदिर है। यह भगवान कृष्ण और उनकी प्रेमिका राधा दोनों का घर है। उन्हें बिना शर्त प्यार का प्रतीक माना जाता है।

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रायगढ़ का किला: यह छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने किलों में से एक है। रायगढ़ का नामकरण इसी किले के आधार पर हुआ है।

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चक्रधर समारोह: यह त्यौहार हर साल गणेश चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। इस विशाल आयोजन में भाग लेने के लिए देश भर से हज़ारों लोग आते हैं। चक्रधर समारोह देखना वाकई एक अलग ही अनुभव है। इस त्यौहार में कई तरह की सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती हैं। इस समारोह में लोगों की भारी भीड़ भी होती है। बता दें कि 'चक्रधर समारोह' रायगढ़ की पहचान बन चुका है।राजा चक्रधर सिंह ने यहां 1924 से 1947 तक शासन किया। वे एक बेहतरीन तबला वादक और गायक भी थे। राजा चक्रधर संगीत, नृत्य, गायन, लेखन आदि अनेक विधाओं मैं निपुण थे। वे स्वयं इस कार्यक्रम में तबला भी बजाते थे। चक्रधर के देहावसान के बाद उनकी याद में "चक्रधर समारोह" के नाम से यहां वर्ष 1985 से दस दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत की गई । जिसने देशभर में ख्याति अर्जित की।

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गोमर्डा अभ्यारण्य माडो सिल्ली: गोमर्डा अभ्यारण्य माडो सिल्ली रायगढ़ के आस-पास के शीर्ष आकर्षणों में से एक है, और यह शहर से केवल 75 किमी दूर है। यह क्षेत्र का सबसे बड़ा पिकनिक स्पॉट, हाइकिंग स्पॉट, हिल स्टेशन और वन्यजीवों के लिए शरणस्थल है, और यह 275 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।