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इधर शिक्षकों के बिना स्कूल बदहाल तो उधर छात्रावास अधीक्षक हो रहे हैं लाल

95 शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाए छात्रावास व आश्रमों में बच्चों के देख-रेख में लगे

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95 शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाए छात्रावास व आश्रमों में बच्चों के देख-रेख में लगे

95 शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाए छात्रावास व आश्रमों में बच्चों के देख-रेख में लगे

रायगढ़. जिले के 95 शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाए छात्रावास व आश्रमों में बच्चों के देख-रेख में लगे हुए हैं। एक ओर जहां स्कूलों में सहायक शिक्षक से लेकर प्रधान पाठक तक के कई पद खाली पड़े हुए हैं वहीं इतनी अधिक संख्या में पिछले लंबे समय से शिक्षकों को छात्रावास व आश्रमों का जिम्मा देकर रखा गया है।


अब स्थिति की बात करें तो जिले में संचालित होने वाली छात्रावास व आश्रम अजाक विभाग के अधिन संचालित होता है जिले में कुल मिलाकर 187 छात्रावास व आश्रम संचालित होता है, लेकिन इसमें देखा जाए तो आधे से भी कम छात्रावासों में नियमित अधीक्षक की भर्ती हो पाई है। यह कहानी पिछले कई सालों से चल रही है।

जिसके कारण स्कूलों में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है। उक्त छात्रावासों में अधीक्षक बनकर बैठे शिक्षकों पर गौर किया जाए तो सहायक शिक्षक पंचायत, शिक्षक पंचायत, व्याख्याता, उच्च वर्ग शिक्षक और प्रधान पाठक जैसे पदों में पदस्थ शिक्षक अधीक्षक का कार्य कर रहे हैं। हर साल परीक्षा के पहले खासकर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित सरकारी स्कूलों से विषय विशेषज्ञ और शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग करते हैं लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो पाती है।


अंत में वहां पढऩे वाले छात्रों को जैसे-तैसे अपने हिसाब से ही तैयारी कर परीक्षा में बैठना पड़ता है। जिले के कई सरकारी स्कूलों में तो विषय विशेषज्ञ की कमी के कारण हिंदी के ही शिक्षक विज्ञान और अन्य विषय पढ़ाते हैं इसकी भी शिकायत कई बार देखने को मिली है। हांलाकि लंबे समय बाद कई स्कूलों में बाद में शिक्षकों की व्यवस्था की गई लेकिन कई स्कूलों में संबंधित विषय के शिक्षक ही नहीं मिले।


होती है परेशानी
पिछले कई सालों से छात्रावासों में शिक्षक अधीक्षक के रूप में पदस्थ हैं। इनको आज तक स्कूलों में वापस नहीं भेजा गया। जबकि देखा जाए तो शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए पिछले चार-पांच सालों से शिक्षा विभाग सीएसआर का सहारा ले रहा है। और सीएसआर शिक्षक के रूप में हर साल चार सौ से पांच सौ शिक्षकों की भर्ती की जाती है।


नेताओं के पास संलग्न
छात्रावास और आश्रमों में अधीक्षक के पद के अलावा जिले में दर्जन भर से अधिक शिक्षक जनप्रतिनिधियों के पास भी संलग्न हैं। उक्त शिक्षक भी पिछले कई सालों से संलग्न हैं। लोगों का मानना है कि ऐसे संलग्न शिक्षकों को अगर मूल कार्य में लगाया जाए तो कई स्कूलों का भला हो जाएगा। पर फिक्र किसी को नहीं है।


आज तक इन्होंने भी नहीं की आपत्ति
गुरुजी अधीक्षक बनकर लाल हो रहे हैं इसका ठोस कारण यह है कि अधीक्षक पद पर पदस्थ किसी भी गुरुजी ने अपने वापसी के लिए कोई आवेदन विभाग को नहीं दिया है जिसमें यह कहा गया हो कि उनका मूल कार्य शिक्षा देना है,

बच्चों को शिक्षित करना है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ये गुरुजी अपने मूल कार्य पर वापस क्यों नहीं आना चाहते हैं। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि अधीक्षक बनने के लिए काफी प्रयास किए जाते हैं और बने रहने के लिए तो और भी प्रयास किए जाते हैं।