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वनांचल क्षेत्र का ये स्कूल शिक्षकों की दृढ़ इच्छा शक्ति से पूरे जिले का ध्यान खींच रहा अपनी ओर

बच्चों का चयन नवोदय और एकलव्य में बड़े आसानी से

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बच्चों का चयन नवोदय और एकलव्य में बड़े आसानी से

बच्चों का चयन नवोदय और एकलव्य में बड़े आसानी से

रामकृष्ण पाठक/कुड़ेकेला. सरकारी स्कूल में व्यवस्था यदि निजी स्कूल के जैसी दिखे, सुविधा यदि निजी स्कूल के जैसा दिखे तो हैरत होती है। जिले के कई स्कूलों में दृढ़ संकल्प के दम पर ऐसा किया गया है।

इसी कड़ी में एक और नाम जुड़ गया है। बेहतरीन शिक्षा का आलम यह है कि यहां के बच्चों का चयन नवोदय और एकलव्य में बड़े आसानी से होता है।


जिले के धर्मजयगढ़ विकासखंड के देउरमार पंचायत के टोला लामीखार प्राथमिक पाठशाला को अब नई पहचान मिल गई है। सन 1981 से स्थापित सरकारी प्राथमिक पाठशाला विकासखंड के सभी निजी स्कूलों को भी मात दे रहा हैं। यह क्षेत्र घने जंगलों के बीच बसा विकासखंड का अंतिम छोर है।

यहां मूलभूत सुविधाओं के लिए लोग शासन की बाट ताकते नजर आते हैं। इसके उलट यहां के सरकारी स्कूल की सुविधा नगर की सुविधा को मात दे रही है। इस सरकारी स्कूल में प्रोजेक्टर के माध्यम से खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाई करवाया जाता है। साथ ही साथ सन 1981 का बना भवन जर्जर हो जाने के कारण इसका जीर्णोद्धार किया गया और कलात्मक पेंटिंग बनायी गयी है।

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परिसर की ही सब्जियां
प्राथमिक शाला लामिखार में शिक्षक निरंजन पटेल ने बताया कि स्कूल परिसर में मध्यान भोजन के लिए साग- सब्जी लगाकर ताजी सब्जियों का उपयोग किया जाता है।


दीवारों से भी देते हैं शिक्षा, छात्र लेते हैं रुचि
इस स्कूल में दीवारों के माध्यम से भी शिक्षा दी जाती है। स्कूल में सौर मंडल, उल्का पिंड, नौग्रह आदि निर्माण कर बच्चों को विज्ञान की शिक्षा दी जा रही है।

वहीं परिसर के अंदर भारत के नक्शे और छत्तीसगढ़ के नक्शे का आकार देकर पौधरोपण किया गया है। वहीं परिसर के अंदर ही बच्चों को बैठाकर मध्यान भोजन करने के लिए टेबल-बेंच की भी व्यवस्था की गई है।
&इसकी प्रेरणा हमें पूर्व संकुल समन्वयक अश्वनी पटेल से मिली है। सभी शिक्षकों व बीईओ का मार्गदर्शन मिलता रहा है। शाला प्रबंधन समिति का भी सहयोग मिलता रहा है। सरकारी स्कूल ना समझ कर अपने स्कूल के तर्ज पर हमने इस कार्य को किया है।
निरंजन पटेल, सहायक शिक्षक