
नियमित हुए शिक्षाकर्मियों ने शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाए जाने के सवाल पर क्या कहा, पढि़ए खबर...
रायगढ़. संविलियन के बाद शिक्षाकर्मियों का रुतबा बदल गया है। शिक्षाकर्मी अब नियमित शिक्षक हो गए हैं लेकिन इनके इरादे और व्यवस्था में परिवर्तन नहीं आया है। पहले दिन प्राची बिहार स्थित स्कूल में देखा गया कि प्रधान पाठक व एक शिक्षक चुनाव के कार्य में व्यस्त थे और बच्चे क्लास में खेल रहे थे पूछने पर बोले कि स्वयं से पढ़ाई कर रहे हैं। कहीं शिक्षक कार्यालयीन कार्य कर रहे थे तो कहीं और कुछ। वहीं संविलियन की खुशी में पौधरोपण कर पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया गया है, पर जब शिक्षा के प्रति क्या बदलाव लाएंगे, अपने स्कूल में शिक्षा को जिले के अन्य स्कूलों से बेहतर कैसे बनाएंगे ये सवाल उठाया गया तो कुछ विशेष सुनने को नहीं मिला।
संविलियन के बाद ऐसे शिक्षकों का सोमवार को स्कूल में पहला दिन था। लेकिन स्कूलों में देखा जाए तो व्यवस्था पहले की तर्ज पर ही चल रही थी। पत्रिका ने कुछ स्कूलों में जाकर स्थिति को टटोलने की कोशिश की, जिसमें प्राची विहार स्थित मीडिल स्कूल में दोपहर करीब १ बजे एचएम और एक महिला शिक्षक उपस्थित थे जो कि अध्यापन के बजाए चुनाव के लिए मांगी गई जानकारी तैयार करने में लगे हुए थे वहीं स्कूल के अंदर कुछ बच्चे अपने से पढ़ रहे थे तो कुछ कागज फाड़कर कुछ बना रहे थे और कुछ सो रहे थे, इसी प्रकार अंबेडकर आवास के समीप स्थित स्कूल में भी देखा गया कि वहां अध्यापन का कार्य चल रहा है।
जब उक्त दोनो ही स्कूल में अध्यापन कराने वाले शिक्षकों से संविलियन को लेकर चर्चा की गई तो पहले तो उन्होंने कहा कि काफी लंबे समय बाद हमारी मांगे पूरी हुई है इससे मन में काफी उत्साह है और कार्य करने की क्षमता में भी वृद्धि हुई है लेकिन वहीं जब इस बारे में पूछा गया कि शिक्षाकर्मी से शिक्षक के पद पर आने के बाद स्कूल की व्यवस्था और अध्यापन कार्य में किस तरह का परिवर्तन आएगा और इसके लिए क्या सोचा है तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था। सभी ने एक ही बात कही कि पहले भी ईमानदारी के साथ अध्यापन करा रहे थे और अब भी ईमानदारी के साथ पढ़ाई कराएंगे।
लिया संकल्प
संविलयन से शिक्षक बने शिक्षाकर्मियों ने पहले दिन स्कूलों में पौधरोपण किया है। वहीं कुछ शिक्षकों से चर्चा के बाद उन्होने बताया कि स्कूलों में पहले शिक्षाकर्मियों का वेतन आबंटन सिस्टम पर था जिसके कारण दो से तीन माह में एक बार वेतन मिलता था। इसके लिए चक्कर काटने पड़ते थे। अब यह समय बचेगा।
-अब और उत्साह के साथ गुणवत्ता लाने का प्रयास करेंगे। पहले वेतन को लेकर चक्कर काटने पड़ते थे वह समय बचेगा जिसको स्कूलों मे देंगे। वहीं संविलयन के बाद पहले दिन पौधरोपण कर उसे जीवित रखने का संकल्प लिया गया है- शैलेंद्र मिश्रा, प्रवक्ता
Published on:
3 Jul 2018, 1:07 PM IST
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