
मध्याह्न भोजन फंड के 1 करोड़ गायब, खाना खाने बच्चे घर से लाते हैं थाली
जितेन्द्र दहिया@रायपुर. दो दिन पहले केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग ने स्कूली बच्चों के बस्ते का वजन तय कर दिया है, लेकिन प्रदेश के सरकारी स्कूल में पढऩे वाले बच्चे बस्ते में किताबों के अलावा थाली और गिलास का भी बोझ ढो रहे हैं।
क्योंकि, विद्यालयों में संचालित मध्यान्ह भोजन के लिए आवंटित थालियां गायब हो चुकीं हैं। ऐसे में केंद्रीय मानव संसाधन विभाग का आदेश का किस हद तक पालन किया जाएगा, इसमें संदेह है।
बोरे बेच कर थालियां खरीदने के लिए इक_ा किए गए 1 करोड़ 20 लाख रुपए का भी पता नहीं है। बच्चों को मजबूरीवश किताबों के साथ थाली और गिलास लेकर स्कूल जाना पड़ रहा है। इस योजना के तहत विद्यालयों को किचन सामग्री भी दिया जाना है, जिसमें थाली और गिलास भी शामिल है। योजना शुरू होने के इतने साल बाद भी ये व्यवस्थाएं नहीं की गई हैं। यह स्थिति तब है, जब सरकारी बीते 8 सालों से इस योजना पर करोड़ों रुपए फूंक रही है।
यह है मीनू
सोमवार को मसूर दाल एवं एक सब्जी, मंगलवार को देशी चना, बुधवार को सब्जी, गुरुवार को दाल और अचार, शुक्रवार को सोयाबड़ी, शनिवार को राहद दाल और हरी सब्जी थालियों में परोसी जानी है।
सालों पहले गायब हो गईं थालियां
मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत में प्रदेश के सभी स्कूलों को थाली-ग्लास के लिए 2000 से 2500 रुपए आवंटित किए गए थे। अब अधिकांश स्कूलों की थालियां गायब हो चुकी हैं। जिन स्कूलों में थालियां हैं भी तो वे अलमारी में पड़ी हैं। इसके पीछे जिम्मेदार यह दलील देते हैं कि बच्चों की जूठी थाली धोने के लिए कोई तैयार नहीं है।
मामले की नहीं है जानकारी
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव गौरव द्विवेदी ने बताया कि बर्तन केंद्र की ओर से दिए जाते हैं, जो कि पिछले कई वर्षों से नहीं मिले हैं। जहां तक बात है चावल के बोरों की बिक्री कर इनकी खरीदी की, इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि उस दौरान मेरी पोस्टिंग कहीं और थी।
चावल के बोरे बेचकर जुटाए थे फंड
रा ज्य सरकार ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग से मध्याह्न भोजन के लिए थाली व प्लेट उपलब्ध कराने के लिए राशि की मांग की थी। इसके जवाब में आदेश आया कि प्रदेश को 80-85 मीट्रिक टन चावल की सप्लाई जूट के बोरों में की जाती है। इससे मध्याह्न भोजन संचालनकर्ताओं के पास लगभग एक लाख 60 हजार से एक लाख 70 हजार जूट के संग्रहित बोरे बेचकर थाली व ग्लास खरीदे जाएं।
एक करोड़ में बेचे बोरे
विभाग द्वारा संगृहित बोरों के विक्रय से तकरीबन 1 करोड़ बीस लाख की राशि आई थी। असल में इस राशि का उपयोग जिस काम के लिए होना था, वह अब तक नहीं हुआ। इसकी बजह से 40 लाख बच्चे घरों से थालियां ढोकर ला रहे हैं।
आंकड़ों पर एक नजर
कुल स्कूल - 47717
किचन डिवाइस प्राप्त - 32344
किचन डिवाइस नहीं मिला - 13582
स्कूल जिनकी जानकारी नहीं - 375
Published on:
29 Nov 2018 08:59 am
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