7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

इस बीमारी से अब तक हो चुकी है 17 मौतें, 38 पीड़ित, नहीं मिला योजना का लाभ

प्रदेश सरकार ने सिलिकोसिस के मरीजों को 3-3 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश जारी किए थे
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Deepak Sahu

•

Updated: 24 Nov 2018, 9:16 AM IST

Silicosis

इस बीमारी से अब तक हो चुकी है 17 मौतें, 38 पीड़ित, नहीं मिला योजना का लाभ

रायपुर . प्रदेश सरकार ने सिलिकोसिस के मरीजों को 3-3 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन जिले में हुई 17 मृतकों और 38 पीडि़त मरीजों को अब तक इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। सिर्फ 4 मरीजों को योजना का लाभ मिल पाया है।

श्रम विभाग की औद्योगिक स्वास्थ एवं सुरक्षा विंग द्वारा रिपोर्ट तैयार कर शासन द्वारा मरीजों को इसकी जानकारी भेजी जाती है। इसके बाद राशि आवंटित होती है। जिन मजदूरों ने मेडिकल रिपोर्ट के साथ आवेदन किया है, उन्होंने कार्यस्थल जिस फैक्ट्री को भी बताया है।

यह है नियम
इस योजना के तहत लाभ लेने के लिए मरीजों या उनके परिजनों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सक्षम चिकित्सक, शासकीय मेडिकल कॉलेज अथवा जिला अस्पतालों में कार्यरत चेस्ट एवं टी.बी. विशेषज्ञ, पंडित जवाहर लाल स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर की व्यवसाय जन्य रोग निदान समिति, कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं, बीमा चिकित्सा अधिकारी, उप संचालक अथवा सहायक संचालक चिकित्सा, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा में से किसी एक के द्वारा श्रमिक में सिलिकोसिस बीमारी की पुष्टि किया जाना आवश्यक किया गया है। तब जाकर लाभ मिल पाएगा।

खेत बेचकर इलाज फिर भी नहीं बची जान
कुछ दिन पहले सिलिकोसिस बीमारी के चलते एक युवक की मौत हुई थी। उसका नाम दिलेश्वर वर्मा बताया जा रहा है। उसकी पत्नी का कहना है कि घेर खेत बेच कर पति का इलाज कराया, लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी नही बच पाए। उरला की एक फैक्ट्री में वह काम कर रहा था। बीमारी के कारण कुछ दिन पहले मृत्यु हुई है।

बिरगांव में धुल डस्ट एवं धुआं के चलते अब तक 38 से ज्यादा लोग इस बिमारी के शिकार हो चुके है। लाइलाज बिमारी से इलाके में सैकड़ों लोग ग्रसित हैं जिनको फेफड़े से संबंधित परेशानियां है। उरला, सिलतरा, भनपुरी, अछोली समेत आसपास के ओद्योगिक क्षेत्रों में पहली बार सिलिकोसिस नाम की बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है।

यह है सिलिकोसिस
सिलिकोसिस मुख्यतया पत्थर खदानों में होती है। सिलिकायुक्त धूल में लगातार सांस लेने से फेफड़ों में होने वाली बीमारी को सिलिकोसिस कहा जाता है। पत्थरों की घिसाई करने वाले कारीगर, श्रमिक और खदानों में पत्थर निकालने वाले श्रमिक इसके अधिक शिकार होते हैं। इसमें मरीज के फेफड़े बेकार हो जाते हैं।

श्रम विभाग के सचिव आर. संगीता ने बताया कि जिले में जिन मरीजों के आवेदन मिलते हैं उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। अब तक जितने भी मरीजों की रिपोर्ट पहुंची है उन्हें राशि आवंटित की जा चुकी है।