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रायपुर के कुंबरगढ़ में बड़ा हादसा, 25 फीट गहरी बावड़ी में डूबने से 2 मासूम बच्चों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल

Kumbhar Garh Accident: रायपुर जिले के धरसीवां स्थित कुंबरगढ़ में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर की करीब 25 से 30 फीट गहरी बावड़ी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई।
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Chaturbhuj Temple Raipur

डूबने से 2 मासूम बच्चों की मौत (फोटो सोर्स- पत्रिका)

2 Children Drowned in Well: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के धरसीवां विकासखंड स्थित कुंबरगढ़ में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर की 25 से 30 फीट गहरी बावड़ी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। सूचना मिलते ही धरसीवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों बच्चों के शवों को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस हादसे के बाद मंदिर परिसर में स्थित खुली बावड़ी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

दोनों बच्चे कुर्रा गांव के रहने वाले थे

पुलिस के अनुसार, मृतक बच्चों की पहचान साक्षी साहू (7 वर्ष), पिता योगेश साहू और श्रवण धीवर (4 वर्ष), पिता भूपेंद्र धीवर के रूप में हुई है। दोनों बच्चे धरसीवां विकासखंड के कुर्रा गांव के निवासी थे। हादसे की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। बच्चों की मौत (Child Drowning Incident) से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

खेलते-खेलते बावड़ी तक पहुंचे बच्चे

जानकारी के मुताबिक, कुंबरगढ़ स्थित प्राचीन चतुर्भुजी मंदिर परिसर (Chaturbhuj Temple Raipur) में वर्षों पुरानी एक गहरी बावड़ी मौजूद है। आसपास के बच्चे अक्सर मंदिर परिसर में खेलने आते हैं। शुक्रवार को भी साक्षी और श्रवण अन्य बच्चों के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान दोनों किसी तरह बावड़ी के पास पहुंच गए और खेलते-खेलते गहरे पानी में उतर गए। करीब 25 से 30 फीट गहरी बावड़ी में जाने के कारण दोनों डूब गए और बाहर नहीं निकल सके।

ग्रामीणों ने शुरू की तलाश, गोताखोरों की मदद से निकाले गए शव

जब बच्चों का काफी देर तक कोई पता नहीं चला तो ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। संदेह होने पर बावड़ी में खोजबीन की गई और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से दोनों बच्चों को बावड़ी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भेज दिया।

सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से बढ़ा हादसे का खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर की यह प्राचीन बावड़ी काफी गहरी है, लेकिन इसके चारों ओर न तो मजबूत घेराबंदी की गई है और न ही किसी तरह के चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। यहां बच्चों और श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहती है, जिससे भविष्य में भी ऐसे हादसों की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए होते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

पहली बार हुआ इतना बड़ा हादसा

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बावड़ी ऐतिहासिक महत्व की है। बताया जाता है कि प्राचीन काल में राजा कुंबरसिंह के शासनकाल के दौरान उनकी रानी भी इसी बावड़ी का उपयोग करती थीं। वर्षों पुराने इस ऐतिहासिक स्थल पर इससे पहले कभी इस तरह की दुर्घटना सामने नहीं आई थी। पहली बार हुई इस घटना ने पूरे कुंबरगढ़ और आसपास के क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

जाली और सुरक्षा घेराबंदी की मांग

दर्दनाक हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्राचीन बावड़ी के चारों ओर मजबूत जाली और सुरक्षा घेराबंदी कराई जाए। साथ ही चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, ताकि भविष्य में कोई मासूम या श्रद्धालु इस तरह की दुर्घटना का शिकार न हो। लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ वहां आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

पुलिस ने शुरू की जांच

धरसीवां थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी राजेंद्र दीवान ने बताया कि पंचनामा की कार्रवाई के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि घटना के कारणों की जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का प्रयास किया जाएगा।

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