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धान किसानों के बोनस के लिए मिले 21 सौ करोड़, विपक्ष ने मांगा दो वर्षों का बकाया

विधानसभा के विशेष सत्र में तीखी बहस और नोकझोक के बीच 2101 करोड़ 54 लाख 77 हजार एक सौ रुपए का अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पारित हो गया।

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धान किसानों के बोनस के लिए मिले 21 सौ करोड़, विपक्ष ने मांगा दो वर्षों का बकाया

रायपुर . विधानसभा के विशेष सत्र में तीखी बहस और नोकझोक के बीच 2101 करोड़ 54 लाख 77 हजार एक सौ रुपए का अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पारित हो गया। इस राशि में से 2100 करोड़ रुपए समितियों को धान बेचने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 300 रुपए की दर से बोनस देने में होगा।

शेष एक करोड़ 54 लाख 77 हजार रुपए छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के भवन और छात्रावास के निर्माण के लिए रखी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अनुदान मांग रखते हुए कहा, धान छत्तीसगढ़ की संस्कृति का हिस्सा है। प्रकृति की मार झेल रहे किसानों को राहत देने के लिए इस राशि का प्रावधान किया है।

नवरात्रि में इसकी व्यवस्था होने से लाखों किसानों और मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलेगा। विपक्ष सरकार की इस कोशिश को अपर्याप्त बताता रहा। उनका कहना था कि यह मात्र छलावा है। सरकार को वादे के मुताबिक शेष बच गए दो वर्षों का बकाया बोनस भी किसानों को देना चाहिए। वहीं धान उत्पादक सभी किसानों को बोनस देने की मांग उठी। इसको लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दिन भर तीखी बहस चली।

रमन विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने किसानों के बोनस के लिए 2101 करोड़, 54 लाख, 77 हजार, एक सौ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया। उन्होंने कहा कि यह बजट ऐसे समय पेश किया गया है जब नवरात्रि चल रही है। सरकार का यह निर्णय किसानों के लिए संजीवनी का काम करेगा। मुख्यमंत्री जब भाषण दे रहे थे तब अचानक उन्हें खांसी आ गई।

इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने चुटकी लेते हुए कहा कि सीएम साहब को खांसी आ रही है... पानी पिलाओ। मुख्यमंत्री ने भी त्वरित जवाब दिया- पानी तो अब आप लोग पी रहे हैं। जब तक बोनस घोषित नहीं हुआ था तब तक विपक्ष चेहरा खिला हुआ था, लेकिन जैसे ही तय हो गया कि अब किसानों को बोनस दिया जाएगा तो चेहरा फ्यूज बल्ब की तरह हो गया है। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार एक दिन का सत्र बुलाने की जरूरत सिर्फ इसलिए पड़ी क्योंकि मामला किसानों से जुड़ा है।