
नकटी मामले पर सदन में घमासान (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Politics: विस के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का मुद्दा गरमाया रहा। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सदन के भीतर और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर सरकार को चौतरफा घेरा। विधानसभा में जहां स्थगन प्रस्ताव अग्राह्य होने पर तीखी नोंकझोंक और हंगामे के बाद कांग्रेस के 32 विधायक निलंबित हो गए। वहीं सड़क पर कांग्रेसियों ने प्रभावित ग्रामीणों के साथ नकटी से लोकभवन (राजभवन) तक पैदल मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया।
शून्यकाल के दौरान विपक्ष ने नकटी गांव का मामला उठाते हुए काम रोको (स्थगन) प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग रखी। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इससे असंतुष्ट होकर विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह में दाखिल हो गए। गर्भगृह में प्रवेश करते ही नियम के तहत विपक्ष के सभी 32 विधायक स्वयंमेव निलंबित हो गए।
इधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और नकटी के प्रभावित ग्रामीणों ने राजभवन कूच किया। पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर पदयात्रा को रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झूमा-झटकी भी हुई। इसके विरोध में प्रदेश अध्यक्ष बैज और बेघर हुए ग्रामीणों ने सड़क पर ही बैठकर भोजन किया और अपना विरोध दर्ज कराया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शून्यकाल में मुद्दा उठाते हुए कहा कि नकटी में अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने के अधिकार) का सीधा उल्लंघन है। सरकार के किसी भी मंत्री ने इनके प्रति दया नहीं दिखाई। वहीं, विधायक उमेश पटेल ने पूछा कि आखिर यहां बुलडोजर चलाने की क्या आवश्यकता थी? कवासी लखमा ने आरोप लगाया कि नकटी की कार्रवाई से पूरे देश में गलत संदेश गया है, जहां रातभर बच्चे सो नहीं सके और उनके आशियाने उजाड़ दिए गए। चर्चा में विधायक संगीता सिन्हा, लखेश्वर बघेल और देवेंद्र यादव ने भी हिस्सा लिया।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक और नियमानुसार की गई है। भिलाई के एक व्यक्ति की शिकायत पर जांच की गई थी, जिसमें पता चला कि नकटी में अवैध प्लाटिंग कर ग्रामीणों से कब्जा कराया जा रहा है। अतिरिक्त तहसीलदार की जांच के बाद 77 लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। कब्जाधारियों ने इसके खिलाफ एसडीएम के पास अपील की थी, जो खारिज हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि 77 में से 66 परिवारों को नवा रायपुर में पुनर्वासित किया जा चुका है।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक सुनील सोनी, राजेश मूणत और मोतीलाल साहू ने राज्य में बढ़ती आगजनी की घटनाओं और फायर स्टेशनों की कमी का मुद्दा उठाया। जवाब में डिप्टी सीएम व गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्वीकार किया कि प्रदेश के छह जिलों में अभी तक फायर स्टेशन की सुविधा नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि फायर स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए विभाग को 156 करोड़ रुपए का आवंटन मिला है और 22 नए वाहनों की खरीदी की जा रही है।
गृह मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016 में अग्निशमन विभाग को अलग स्वरूप दिया गया था, लेकिन पिछली सरकार ने भर्तियां नहीं कीं। वर्तमान सरकार ने रिक्त 295 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुढ़ियारी और उरला फायर स्टेशन के मुद्दों पर उन्होंने खुद निरीक्षण और जांच कराने की बात कही।
Updated on:
16 Jul 2026 06:31 am
Published on:
16 Jul 2026 06:30 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
